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- मोदी के ‘विकास’ के मुकाबले को सरकार लाई ‘जनता की भागीदारी’
मोदी के ‘विकास’ के मुकाबले को सरकार लाई ‘जनता की भागीदारी’
ञ्चभारत निर्माण शृंखला-3 के विज्ञापन का संदेश, ‘बिना जनता की सहभागिता के कोई योजना नहीं होती सफल’
संतोष ठाकुर - नई दिल्ली
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के विकास के दावों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने भारत निर्माण शृंखला-3 के विज्ञापनों में जनता की भागीदारी को प्रचार के केंद्र में लाने का निश्चय किया है। इस कड़ी के जो भी नए विज्ञापन आएंगे उसमें बताया जाएगा कि सरकार चाहे कुछ भी करे, कोई भी योजना तब तक कामयाब नहीं है जब तक जनता की भागीदारी नहीं हो। संकेत साफ है। मोदी ने अकेले कुछ नहीं किया है। ऐसे में उनका गुणगान जनता को नजरअंदाज करना है। यह तो जनता है, जिसने किसी भी योजना को सफल बनाया है। लेकिन फिर जनता नेपथ्य में क्यों है?
सरकार की ओर से आने वाले दिनों में जारी किए जाने वाले विज्ञापनों की एक बानगी देखिए। ‘मेट्रो हम लाए, लेकिन इसे सजाया-संवारा तो आपने’। ‘दूरसंचार को हमने गति दी, लेकिन सीमा पर अपने बेटे को तो आपने भेजा’। ‘पोलियो की दवा हमने जरूर पिलाई, लेकिन सभी मुसीबतों के बाद अपने ब\\\'चों को बूथ तक तो आप लाए’। ‘सड़क हमने जरूर बनाई, लेकिन इसके किनारे ढाबा खोलकर खाना तो आपने खिलाया’। संकेत साफ और सीधा है। यह जनता है जिसकी सहभागिता से कोई भी योजना सफल होती। अकेले सरकार कुछ नहीं कर सकती है। ऐसे में सरकार उपलब्धि का सेहरा बिना जनता को श्रेय दिए अपने सर कैसे बांध सकती है।
एक अधिकारी ने कहा ‘यह विज्ञापन शृंखला मोदी का जवाब नहीं है। इसका उद्देश्य सिर्फ जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और उससे जुड़ाव महसूस करने के लिए प्रेरित करना है। जिससे इनका क्रियान्वयन ठीक से हो। अगर कोई इसमें मोदी बनाम सरकार का अंश देखता है तो यह उसका नजरिया हो सकता है। सरकार ने इस उद्देश्य से ये विज्ञापन नहीं बनाए हैं।’ हालांकि इस अधिकारी ने कहा कि भारत शृंखला का विज्ञापन यह जरूर बताना चाहता है कि पिछले दस साल में विकास हुआ है। अगर देश के ढांचागत विकास की बात करें तो 30 प्रतिशत ढांचागत विकास बीते दस साल में ही हुआ है। अगर सेवा क्षेत्र की बात करें तो 80 प्रतिशत क्षेत्र का विकास पिछले दस साल में हुआ है। वहीं ब्रॉडकास्टिंग या प्रसारण क्षेत्र में करीब 80 प्रतिशत कार्य इसी दौरान हुआ है। भारत निर्माण शृंखला के विज्ञापन में यह भी दर्शाया जा रहा है कैसे मेट्रो, फ्लाईओवर, सड़कों का संजाल बीते दस साल में बना है।
शहर और गांवों के लिए अलग विज्ञापन सीरीज: सूत्रों के मुताबिक इस शृंखला पर करीब 70 करोड़ रुपये सरकार खर्च कर रही है। ग्रामीण और शहरी इलाकों के लिए अलग विज्ञापन शृंखला होंगी। इन विज्ञापनों को खबरिया चैनलों के साथ ही मनोरंजन चैनल और क्षेत्रीय चैनलों पर भी प्रसारित किया जाएगा। इसके अलावा रेडियो और अखबार के विज्ञापन की शृंखला भी शुरू होगी। इनके अलावा सोशल मीडिया पर भी विज्ञापन को लेकर व्यापक कार्यक्रम बनाया गया है।
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