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सिद्धांतों के बिना राजनीति पंगु :शास्त्री
भास्कर न्यूज - करनाल
सिद्धांतों के बगैर राजनीति पंगु है। जहां सिद्धांत विहीन राजनीति के केंद्र में सत्ता होती है ऐसा शासन अंत: भटकाव की ओर चला जाता है। शासन के ऐसे भटकाव के गर्भ से ही विभिन्न प्रकार की समस्याएं जन्म लेती हैं। लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है सिर्फ सिद्धांतों के सहारे ही राजनीति चल सकती है। बेहतर राजनीति एवं सुशासन के लिए सिद्धांत और व्यवहार दोनों का समावेश करते हुए बीच का रास्ता निकालना आवश्यक है। ऐसी व्यवस्था ही सही मायने में तरक्की की ओर ले जा सकती है। यह बात वरिष्ठ राजनीतिज्ञ विशेषज्ञ प्रोफेसर संदीप शास्त्री ने कही। वे दयाल सिंह कालेज में राजनीति विभाग द्वारा आयोजित व्याख्यान को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। जिसका विषय था राजनीति सिद्धांतों की प्रासंगिकता एवं मौजूदा चुनौतियां।
प्रोफेसर शास्त्री जेएन युनिवर्सिटी बैंगलूर के वीसी तथा लोकनीति समिति के राष्ट्रीय संयोजक भी हैं।
विद्यार्थियों को निरंतर विश्लेषण करने की जरूरत
प्रोफेसर संदीप शास्त्री ने राज्य शास्त्र के विद्यार्थियों से कहा कि इसे एक ड्राई सब्जेक्ट न समझें राज्य शास्त्र अति महत्वपूर्ण विषय है। जिसमें निरंतर विश्लेषण की जरूरत है। आम आदमी पार्टी एवं केजरीवाल के हालिया धरने को संदर्भित करते हुए कहा कि मुद्दा आप के उद्भव उसका सत्ता में आना तात्कालिक घटनाक्रम नहीं है। यदि हम विभिन्न पहलुओं पर नजर डाले तो इसमें कई अन्य तथ्य सामने आएंगे। यूपी में मौजूदा सपा सरकार एवं इससे पहले बसपा शासन का जिक्र भी प्रोफेसर शास्त्री ने किया। एक सर्वे को संदर्भित करते हुए उन्होंने कहा कि यूपी बीजेपी को आगामी चुनाव में 40 फीसदी वोट मिलने की बात कही जा रही है। ऐसा क्यों हो रहा है कि इसका विश्लेषण गहनता से करना चाहिए।