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बूढ़ी आंखों में देश के भविष्य की सुनहरी तस्वीरन सिर्फ आधुनिक तौर पर एक विकसित देश बल्कि आध्यात्मिक रूप से भारत को विश्व गुरू के रूप में पुन:प्रतिष्ठापित होता देखने की हसरत...

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - करनाल
उम्र 97 साल, शरीर इस कदर कि बिना अटेंडेंट के करवट लेना भी मुश्किल, चेहरा झुर्रियों से बिंधा हुआ और आंखें धंसी हुईं। लेकिन इन आंखों में देश के भविष्य को लेकर आज भी तमाम सतरंगी सपने तैर रहे हैं। जिनका जिक्र करते ही, जाने इन बूढ़ी आंखों में कहां से चमक आ जाती है और खुशीराम खिल उठते हैं। स्वाधीनता आंदोलन में बढ़चढ़ हिस्सा लेने वाले खुशीराम विगत करीब 15 वर्षों से लकवाग्रस्त हैं। लकवे की चपेट में आने के बाद लगभग बिस्तर तक ही उनका संसार सिमट गया है। शहर की बसंत बिहार कॉलोनी स्थित अपने आवास के इसी बिस्तर में लेटे-लेटे खुशीराम देश को लेकर तमाम तरह की बातें सोचते हैं। उम्र के आखिरी पड़ाव में उनकी ख्वाहिश है कि भारत विकसित देश के तौर पर खुद को दुनिया के शिखर पर स्थापित करे। न सिर्फ आर्थिक एवं भौतिक तौर पर बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक तौर पर भारत को पुन: विश्व बनकर दुनिया का नेतृत्व करते हुए देखने की हसरत संजोए इस वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी का हिंदुस्तान के प्रति एक व्यापक और सकारात्मक नजरिया है।