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- बर्बाद हो गया पौने छह हजार मीट्रिक टन गेहूं
बर्बाद हो गया पौने छह हजार मीट्रिक टन गेहूं
महेंद्र सिंह - करनाल
इसे विडंबना कहें या व्यवस्था का नकारापन कि जिस देश में करीब चार करोड़ लोगों को एक वक्त भूखा ही रहना पड़ता है उसी हिंदुस्तान में हजारों मीट्रिक टन अनाज गोदाम में पड़े-पड़े नष्ट हो रहा है। सोचने वाली बाद यह है कि अनाज की बर्बादी पर दोषियों पर कार्रवाई की बजाए सरकार ने संबंधित खाद्यान्न को मात्र रिजेक्ट घोषित करके अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली। ऐसे में सवाल यह है कि खाद्यान्न की इस बर्बादी के लिए जिम्मेदार किसे कहा जाए।
पौने छह हजार एमटी गेहूं खराब
मंडी समिति परिसर में डंप करीब पौने छह हजार एमटी गेहूं बर्बाद हो गया। बावजूद इसके इस बर्बादी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसके विपरीत सरकार ने इस अनाज को रिजेक्ट घोषित करके ही अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। अब अनाज के निस्तारण की कवायद की जा रही है। संबंधित अनाज जिला खाद्य आपूर्ति एवं नियंत्रण विभाग का बताया जा रहा है। अनाज की बर्बादी के बारे में मंडी समिति सीधे-संबंधित विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए खुद की जवाबदेही से बच रही है।
क्षमता से अधिक भंडारण
मंडी समिति परिसर में 5-5 हजार एमटी के दो वेयर हाउस हैं। जानकारी के मुताबिक क्षमता से करीब चार गुना अधिक का भंडारण यहां पर है। इनमें सैकड़ों क्विंटल अनाज खुले आसमान के नीचे ही पड़ा हुआ है। जिस पर बर्बादी की सबसे अधिक मार है। इसमें तमाम लाटे ऐसी हैं जिनका उठान कई वर्षों से नहीं हुआ है। लगातार धूप-बरसात झेलते हुए इन जूट के बोरों की जान निकल चुकी है। इन बोरो के पास से सड़े हुए अनाज की गंध आ रही है।
करनाल . अनाजमंडी में स्टोरेज की बोरियां गलने के कारण फट गई हैं, जिससे उनमें भरा गेहूं बाहर निकल रहा है। कई बोरियां तो ऐसी हैं जिनमे से निकल रहा गेहूं पूरी तरह से काला हो चुका है।