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ब्लैक आउट : शहर के लोगों का गुस्सा आउट ऑफ कंट्रोल
भास्कर न्यूज - कुरुक्षेत्र
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के चलते तीसरे दिन गुरुवार को भी शहर में ब्लैक आउट रहा। अधिकारी बेबस नजर आए, तो पब्लिक लाचार। लाचारी और बेबसी गुस्से में बदली तो लोग फिर सड़क पर उतर आए। जहां बिजली कर्मियों ने ब्लैक आउट रखा, वहीं लोगों का गुस्सा भी तीसरे दिन कंट्रोल से आउट हो गया। शहर में दिनभर जाम लगा प्रदर्शन होते रहे। लोग बिजली-पानी की किल्लत के विरोध में सड़कों पर उतरे। जहां दिनभर शहर में जाम की स्थिति बनी रही। जगह-जगह बिजली की तारों में आए फाल्ट तक अधिकारी पहुंच नहीं सके। दिनभर अधिकारियों की सांसें फूली रहीं। लेकिन फिर भी आधे शहर से बत्ती गुल रही। लाइनों में आई खराबी को ढूंढने में अधिकारियों के पसीने छूटते रहे।
करोड़ों का लगा डाला फटका : रोडवेज व बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के चलते पिछले चार दिन शहर के लिए काफी भारी रहे। 19 से लेकर 23 जनवरी तक शहर बस प्रदर्शनों और धरनों व जामों के नाम रहा। इस दौरान करीब 15 मर्तबा प्रदर्शन हुए। बिजली गुल रहने से इंडस्ट्री को काफी झटका लगा। आम पब्लिक को तो परेशानी हुई ही, लेकिन इंडस्ट्री को इन तीन दिनों के झटके से उबरने में कई दिन लग जाएंगे। जिले में 182 राइस मिल को साढ़े 16 लाख रुपए का तो मात्र लेबर खाली रहने से नुकसान हो चुका है। वहीं लाखों रुपए का डीजल फूंकना पड़ा। इसके बावजूद प्रोडक्शन कम हुआ, उस घाटे का अभी आंकलन तक नहीं हो पाया है। एक राइस मिल में करीब दस वर्कर्स बिजली न होने की वजह से काम छोड़कर बैठे हैं। ऐसे में 300 रुपए प्रति दिन औसत के हिसाब से 182 राइस मिलर्स को करीब साढ़े 16 लाख रुपए का नुकसान हो चुका है। कुरुक्षेत्र राइस मिल एसोसिएशन के प्रधान राजीव सभ्रवाल ने बताया कि यदि दो दिन हड़ताल जारी रही तो राइस मिलर्स बर्बाद हो जाएंगे।
चारों तरफ अंधेरा : तीन दिनों से बिजली ना आने से लोग बेबस हो गए। अधिकारियों को फोन करते, वहां से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। शहर के कई इलाके पूरी रात अंधेरे में रहे। वहीं गांवों में भी यही हालात थे। किसी फीडर को अधिकारी जोड़ तोड़ कर चालू करवाते, तो कुछ ही देर बाद फिर बंद हो जाती। ऊपर से बारिश शुरू हो गई। बुधवार रात को शुरू हुई बरसात गुरुवार सुबह तक जारी रही। ऐसे में ठंड के बावजूद लोगों का गुस्सा भड़कना लाजिमी था।
3 दिन-15 जाम, करोड़ों का नुकसान
अधिकारियों की सांसें फूली
तीन दिन की हड़ताल ने लोगों का सब्र ही नहीं तोड़ा। प्रशासनिक व बिजली अधिकारियों का भी जमकर इम्तिहान लिया। रात भर अधिकारियों की टीमें पेट्रोलिंग करती रही। लेकिन बिजली सुचारु नहीं कर पाई। कारण तकनीकी कर्मचारी तो हड़ताल पर थे, ठेके पर रखे कर्मचारियों के बस में हालात नहीं थे। नतीजतन सुबह होते ही लोग भड़क गए। पहले गुरुद्वारा छठी पातशाही पर लोगों ने जाम लगा डाला। करीब एक घंटा ट्रैफिक ठप रहा। पुलिस को आखिरकार ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा। यहां से अभी निपटे ही थे, कि दोबारा बाजार में जाम लग गया। यहां किसी तरह जाम खुलवा कर अधिकारियों ने राहत की सांस ली तो बिरला मंदिर के आसपास और बाद में सलारपुर रोड के बाशिंदों का गुस्सा भड़क और सड़क पर उतरा। देर शाम खेड़ी मारकंडा के सामने नए बस अड्डे के पास लोगों ने जाम लगा दिया।
जरनेटरों के सहारे पेयजल सप्लाई
कर्मचारियों की हड़ताल के चलते तीन दिन से बिजली पानी किल्लत का ही सामना नहीं करना पड़ा। बल्कि शहर को पीने के पानी के भी लाले पड़ गए। इसीलिए सड़कों पर लोगों का गुस्सा निकला। आखिरकार जरनेटरों का सहारा लेना पड़ा। नगरपरिषद और जनस्वास्थ्य विभाग ने जरनेटरों की व्यवस्था की। जिनकी मदद से सबमर्सिबल पंप चलवा कर पेयजल सप्लाई दी गई। न्यू कॉलोनी, पटेल नगर, न्यू मॉडल टाउन, सुभाष गली, पटियाला बैंक कॉलोनी व वार्ड-20 में पानी किल्लत को देखते हुए नप अध्यक्षा उमा सुधा, सुभाष सुधा, पार्षद मुकंदलाल अरोड़ा ने खुद जनरेटर मंगवाया।
आज से ड्यूटी पर
वहीं डीसी निखिल गजराज ने देर शाम कहा कि अब हड़ताल खत्म हो चुकी है। शुक्रवार से सभी कर्मचारी डयूटी पर पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने अपने स्तर पर भी स्थानीय यूनियन नेताओं और कर्मचारियों से बातचीत की है। यूनियन ने आश्वस्त किया है कि कर्मचारी शुक्रवार को काम पर पहुंचेंगे।
देर रात तक हड़ताल खत्म करने को लेकर रही असमंजस की स्थिति