- Hindi News
- विरोध: काले बिल्ले लगा कर डाक्टरों ने ड्यूटी दी
विरोध: काले बिल्ले लगा कर डाक्टरों ने ड्यूटी दी
कुरुक्षेत्र - अपनी मांगों को लेकर पहले रोडवेज कर्मचारियों ने चक्का जाम किया। बिजली बोर्ड कर्मचारियों ने ब्लैक आउट रख कर तीन दिन जिले को बेहाल कर दिया। अब डाक्टरों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बिजली कर्मचारियों ने जहां ब्लैक आउट रखा था, वहीं डॉक्टरों ने ब्लैक बैजिज लगा अपना विरोध दिखाया। डॉक्टरों के आंदोलन के ऐलान के चलते एक बारगी यही लगा कि अब मरीजों को धक्के खाने पड़ेंगे।
खैर यह नौबत नहीं आई। डॉक्टरों ने विरोध भी जताया, मरीज भी चेक किए। इससे पहले हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन की अगुवाई में डॉक्टरों की मीटिंग हुई। इसमें शुक्रवार को पहले काले बिल्ले लगा विरोध जताने का फैसला लिया। इसके बाद भी यदि सरकार उनकी नहीं सुनती है तो 26 जनवरी को एसएसएमएस एसोसिएशन की प्रदेश कार्यकारिणी मीटिंग बुला आगामी रणनीति तैयार करेगी। 26 जनवरी के बाद डॉक्टरों का आंदोलन लंबा भी खींच सकता है।
विरोध से नहीं कमी से परेशान मरीज: शुक्रवार को हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के आह्वान पर जिले भर के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों ने काले बिल्ले लगा कर विरोध किया। दिनभर डॉक्टर काले बिल्ले लगा कर ड्यूटी पर रहे। इस दौरान जहां ओपीडी में मरीजों की जांच की। वहीं ऑपरेशन थियेटर में ऑपरेशन भी करे। हालांकि डॉक्टरों के विरोध के चलते तो मरीजों को परेशानी नहीं हुई। लेकिन रुटीन में डॉक्टरों की कमी के चलते जरूर मरीज परेशान हुए। शुक्रवार को भी ओपीडी के बाहर लंबी लाइनें रही। मरीज अपनी बारी का इंतजार ही करते दिखे। एलएनजेपी अस्पताल के अलावा पिहोवा, शाहाबाद सहित जिलें की पांचों सीएचसी व सभी 16 पीएचसी पर डॉक्टरों ने काले बिल्ले लगा कर काम किया।
डॉक्टरों की क्यों नहीं सुनती सरकार: एचसीएमएस एसोसिएशन ने शुक्रवार को मांगों को लेकर सरकार के विरुद्ध मैदान में उतरने का निर्णय लिया। सुबह एचसीएमएस पदाधिकारियों व डॉक्टरों की बैठक हुई। एचसीएमएसए के जिला अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र व महासचिव डॉ. जगमिंद्र ने कहा कि लंबे समय से चिकित्सक अपनी मांगों को लेकर सरकार से गुहार लगा रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में भारी दबाव के बीच डॉक्टर काम करते हैं। बावजूद इसके उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। न तो सरकारी सेवा में उतना वेतन मिल रहा है, जितना मिलना चाहिए, ना ही उनकी अन्य मांगे पूरी हो रही हैं।
डॉ. जगमिंद्र ने बताया कि अरसे से डॉक्टर एंट्री लेवल पर वेतन की समीक्षा की मांग कर रहे हैं। वहीं एलएसए व पीजी डॉक्टर की ग्रामीण इलाकों में तैनाती के मामले में रियायत की मांग पर भी कोई सुनवाई नहीं हो रही। पीजी डॉक्टरों को स्पेशल सैलरी मिलनी चाहिए। एचसीएमएसए के वाइस प्रेजीडेंट डॉ. रमेश सभ्रवाल, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. एनपी सिंह, डॉ. योगेंद्र आदि ने कहा कि डॉक्टरों की समस्याओं और मांगों को लेकर सरकार का रवैया काफी सुस्त है। इसी लिए सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टरों में रोष पनप रहा है। डॉ. सभ्रवाल व डॉ.एनपी सिंह ने कहा कि सरकारी सेवा में डॉक्टर जनसेवा ही कर रहे हैं। सुबह से लेकर शाम तक जहां सख्त ड्यूटी देते हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को अमलीजामा डॉक्टरों ने बेहतर तरीके से पहनाया है। बावजूद इसके उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। इस मौके पर डॉ. योगेंद्र, डॉ.अनुपमा, डॉ. एस अरोड़ा, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. एनके परुथी, डॉ. आशिष शर्मा, डॉ. एस राणा, डॉ. राम, डॉ. जेएस संधू, डॉ.लज्जाराम, डॉ. बिमला गौरी, डॉ. विवेक अग्रवाल, डॉ. तनुज, डॉ. शैलेंद्र, डॉ. मनजीत सिंह मौजूद थे।
रूरल की ड्यूटी पर लटकी एसीपी
डॉक्टरों में सबसे ज्यादा रोष रूरल एरिया में पोस्टिंग के नियमों को लेकर है। सरकारी सेवा में पोस्टग्रेजुएट डॉक्टर को स्पेशल इंक्रीमेंट का मसला भी उलझा पड़ा है। वहीं एसीपी पाने के लिए रूरल एरिया में तैनाती जरूरी है। जिस डॉक्टर ने रूरल एरिया में नौकरी नहीं की, उसकी एसीपी पर तलवार लटक गई। एश्योर्ड कॅरिअर प्रोग्रेसन यानी एसीपी में डॉक्टर को पांच, दस और 15 साल सफलतापूर्वक पूरे करने पर मिलती है। इसके तहत वेतनवृद्धि आदि होती है। लेकिन इसके लिए सरकार ने शर्त रखी है कि 15 साल में कम से कम छह साल की नौकरी ग्रामीण इलाकों में होनी चाहिए। एलएनजेपी में इसके चक्कर में कइयों की एसीपी रुकी पड़ी है। जबकि प्रदेश भर में सैकड़ों डॉक्टरों को एसीपी लाभ नहीं मिला। जबकि ताज्जुब इस बात का है कि वे एमओ से एसएमओ तक बन चुके हैं। लेकिन एसीपी का लाभ उन्हें नहीं मिल पाया। हालांकि अधिकांश चिकित्सक रूरल एरिया में ड्यूटी को तैयार भी हैं। डॉक्टर कहते हैं कि सीएचसी व पीएचसी पर डयूटी देने में उन्हें कोई परहेज नहीं है। लेकिन यहां भी सरकार की एक शर्त आड़े आ जाती है। डॉ.जगमिंद्र बताते हैं कि सरकार रूरल एरिया उसे मानती है, जो सीएचसी या पीएचसी नगरपरिषद अथवा नगरपालिका के एरिया में नहीं है। जबकि जिले में अधिकांश सीएचसी नगरपालिका क्षेत्र में हैं। दूसरे एलएनजेपी जैसे अस्पताल में पहले ही विशेषज्ञ डॉक्टर कम हैं। ऐसे में जब बड़े सिविल अस्पतालों में ही चिकित्सक पर्याप्त नहीं हैं तो कैसे सीएचसी या पीएचसी पर नौकरी कर सकते हैं। विभाग विशेषज्ञ चिकित्सकों को सिविल अस्पतालों में ही तैनात रखता है।
आश्वासन मिला : पर दो दिन का वेतन नहीं
डॉक्टरों में इस बात को लेकर रोष नजर आया कि सरकार ने एचसीएमएसए के साथ हुई बातचीत में मांगे मानने का आश्वासन दिया, लेकिन उस पर अमल नहीं किया। उनके दो दिन के वेतन का मसला दो साल बाद भी नहीं सुलझा। डॉ. जगमिंद्र व डॉ. योगेंद्र के मुताबिक सन 2011 में सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर धरना दिया था। तब स्वास्थ्य विभाग ने उनका दो दिन का वेतन काटा था। बाद में उक्त वेतन जारी करने का आश्वासन दिया। इसे लेकर सरकार से कई मर्तबा बातचीत हुई। लेकिन आज तक डॉक्टरों के दो दिन का वेतन नहीं मिला।