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भीष्म पितामह बताएंगे राजाओं के 36 गुण

8 वर्ष पहले
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कुरुक्षेत्र - श्रीकृष्ण संग्रहालय में इस माह एग्जीबिट ऑफ मंथ में पर्यटक व स्थानीय दर्शक महाभारत के भीष्म पितामह के जीवन दर्शन से रूबरू होंगे। म्यूजियम के क्यूरेटर राजेंद्र सिंह राणा के मुताबिक इस साल एग्जीबिट ऑफ मंथ महाभारत पर आधारित रहेगी। इसी लिए जनवरी में मुख्य प्रदर्श के लिए महाभारत के असाधारण चरित्र- भीष्म पितामह का चयन किया गया है। महाराज शांतनु और गंगा के पुत्र भीष्म की गणना आदर्श पितृभक्त, आदर्श सत्यापित, शास्त्रों के महान ज्ञाता और भगवान के परम भक्तों में होती है। महर्षि वश्ष्ठि के श्राप से आठ वसुओं में से एक ‘द्यौ’ नामक वसु ही भीष्म के रूप में पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। बचपन में उनका नाम देवव्रत था।
भीष्म बताते हैं ऐसे हो राजा के गुण: प्रदर्शनी में भीष्म के जीवन दर्शन को दिखाया जाएगा। खासकर राजा के गुणों को लेकर भीष्म की सोच पर आधारित होगी। महाभारत में भीष्म के मुताबिक राजाओं को उचित है कि वह सदा अपने कोषागार को भरा पूरा रखने का प्रयत्न करता रहे।