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सूर्यकुंड का नाला बना आफत

7 वर्ष पहले
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कुरुक्षेत्र - ज्योतिनगर में सूर्यकुंड तीर्थ पर बना नाला लोगों के साथ-साथ जनस्वास्थ्य विभाग व केडीबी प्रशासन के लिए भी आफत बन गया है। ज्योतिनगर में से केडीबी के सूर्यकुंड तीर्थ से होकर गुजरने वाले इस नाले से शहर के गंदे पानी को बाहर निकालने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए करीब 40 लाख रुपए की लागत से नाला भी तैयार किया गया लेकिन नाले का काम बीच में ही लटक गया, जिससे पिछले कई महीनों से शहर का गंदा पानी शहर से दूर गिरने की बजाए सूर्यकुंड तीर्थ में ही गिर रहा है। वहीं इस नाले को दो महीने पहले पत्थरों का मलबा डालकर बंद कर दिया गया है, जिस कारण नाले से पानी गुजर ही नहीं पा रहा है। मामले से केडीबी प्रशासन और जनस्वास्थ्य विभाग दोनों ही बचते दिख रहे हैं।
मलबा डालकर किया नाला बंद : ज्योतिनगर वासी प्रशांत पौलस्तय व मुलतान ने बताया कि दो महीने पहले मलबा डालकर पूरी तरह से बंद कर दिया गया, जिस कारण अब घरों के पास में ही पानी जमा हो रहा है। कौशिक ने कहा कि अगर नाले की योजना को पूरा ही नहीं करना था तो फिर इसे शुरू ही क्यों किया गया। नाले को बनाने पर भारी-भरकम बजट तो खर्च किया लेकिन इसके बाद अधिकारियों ने एक बार भी आकर नहीं देखा कि उनका बनाया नाला किस हालत में है। इतना ही नहीं नाले को मलबा डालकर खराब कर दिया गया है, ऐसे में किसी भी अधिकारी ने इसका संज्ञान नहीं लिया।
10 दिन में निपटाउंगा समस्या : कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड केडीबी के सीईओ सतबीर कुंडू ने बताया कि वे पिछले एक महीने से बाहर गए हुए थे। अगले 10 दिन के अंदर वे इस पूरे मामले की जानकारी लेकर समस्या को दूर कराएंगे।
यह मिलना था लाभ : ज्योतिनगर में से गुजरने वाले इस नाले को बनाकर शहर के सीवरेज के पानी को रेलवे पुल के नीचे से गांधी नगर के रास्ते आगे सरस्वती में डालने की योजना थी। महाभारतकालीन सूर्यकुंड तीर्थ को बदहाल बनाने पर जुटा हुआ है।



विभाग के एक्सईएन केके नागपाल ने बताया कि यह नाला केडीबी प्रशासन के अंडर है। उन्होंने माना कि नाला जनस्वास्थ्य विभाग ने बनवाया जरूर थालेकिन इसके बारे में फाइल देखकर ही बता पाएंगे।

नाला पूरा करे प्रशासन

ज्योतिनगर वासी नरेश सोनी ने बताया कि जनस्वास्थ्य विभाग ने नाले की योजना को अधर में लटकाकर 40 लाख रुपए पूरी तरह से बर्बाद कर दिए हैं। 2 साल पहले यह नाला बनकर तैयार हुआ था, लेकिन शुरू अब तक नहीं हो पाया। वे खुद इस नाले के मामले को लेकर तत्कालीन एडीसी सुमेधा कटारिया से भी मिले थे। नरेश ने बताया कि यह नाला रेलवे पुल के नीचे से गुजरकर आगे जाना था, लेकिन रेलवे पुल से पहले ही इसे सूर्यकुंड तीर्थ में खुला छोड़ दिया गया।