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कलाकार समाज के अभिन्न अंग और संपत्ति होते हैं : अशोक
भास्कर न्यूज - कुरुक्षेत्र
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि कलाकार समाज का अभिन्न अंग हैं। वे समाज की संपत्ति होते हैं। समाज को नई दिशा देने, संस्कृति को सहेज कर रखने में कलाकार की महत्वपूर्ण भूमिका है।
वह गुरुवार को मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर में सूचना, जनसंपर्क एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा आयोजित रोहतक मंडल के भजन पार्टी एवं खंड प्रचार कार्यकर्ताओं की कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि समाज के हर व्यक्ति से कलाकार सहजता से जुड़ सकता है। कलाकारों में अपनी बात या गीतों को प्रभावशाली बनाने के लिए जहां तथ्यों का समावेश होना चाहिए, वहीं गीतों में रोचकता और स्वरों का ध्यान भी रखा जाना चाहिए।
भैरवी के 100 रंग : डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि राग भैरवी के 100 रंग होते हैं। हर रंग से कईं तरह के राग, धुन तैयार की जा सकती हैं। उन्होंने कॉमन और शुद्ध स्वरों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कलाकार को निरंतर रियाज करना चाहिए। उन्होंने इस सत्र में भैरवी, दरबारी व भैरवी देस राग का अभ्यास कराया। कलाकारों से मौके पर ही एक दर्जन से ज्यादा गीतों को लिखवाया।
दस कलाकारों ने पूरे साज-बाज के साथ अपने गीतों की वीडियो रिकार्डिंग भी कराई। जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी धर्मबीर सिंह ने बताया कि कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ संगीत, मंच संचालन, नए गीत लिखने आदि विषयों पर ज्ञान दे रहे हैं, जिसका निश्चित ही कलाकारों को फायदा होगा। कार्यशाला के संयोजक एवं एआईपीआरओ नरेंद्र सिंह भी मौजूद रहे।
कलाकारों को भैरवी, दरबारी और देस रागों का ज्ञान दिया