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जिंदा आदमी को भेजा डेथ सर्टिफिकेट, वोट भी काटा

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - बहादुरगढ़
आसौदा टोडरान गांव निवासी विनोद कुमार पांचाल को तब धक्का लगा जब डाक में आए उसके मृत सर्टिफिकेट को देख परिवार के लोग सकते में आ गए। वे इसे किसी का मजाक मानते रहे, लेकिन अब जब उन्होंने अपना वोट बनवाने के लिए चुनाव कर्मचारी से संपर्क किया तो उन्हें पता चला कि उन्हें मृत घोषित किए जाने के कारण उसका वोट ही काट दिया गया है वह भी बिना जांच करवाए।
यह तो तब है जब बीएलओ उसका फार्म भरकर गया था। अब वह वोट बनवाने के लिए पहले अपने जिंदा होने के सबूत एकत्र करता फिर रहा है, लेकिन उसके लिए भी उसे दर-दर की ठोकरंे खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। अब उसे शुक्रवार को फिर से एसडीएम कार्यालय में बुलाया गया है जहां उसके जिंदा होने के सबूतों की जांच होगी।
कार्यप्रणाली पर सवाल
विनोद कुमार की मानें तो वह बहादुरगढ़ में एटीएम में बतौर सुरक्षा कर्मचारी तैनात रह चुका है व अब वह एचएसआईआईडीसी की फैक्टरी में सुरक्षा कर्मचारी तैनात किया गया है। जब वह मर चुका है तो वह काम कैसे कर रहा है और पुलिस ने उसकी बंदूक का लाइसेंस रिन्यु कैसे किया व कैसे एसडीएम कार्यालय ने बिना जांच करवाए उसका ड्राइविंग लाइसेंस बना दिया।
लिखित शिकायत दी
इस बारे में अब उसने सभी विभागों से निराश होकर गुरुवार को एसडीएम प्रदीप कौशिक के कार्यालय में लिखित शिकायत दी है। उसने एसडीएम कार्यालय द्वारा ही जारी उसके मृत प्रमाण पत्र को जारी कराने वालों की जांच करने का भी निवेदन किया है। डायरी नंबर लेने के बाद अब उसे शुक्रवार को फिर से एसडीएम कार्यालय में बुलाया गया है जहां उसके जिंदा होने के सबूतों की जांच होगी। इस घटना के बाद अब नई चर्चा शुरू होने जा रही है कि मृतक के बारे में रिकोर्ड की कापी कहां रखी जाए।



जांच के लिए लिखा जाएगा : एसडीएम

प्रमाण पत्र इस घटना के बाद अब नई चर्चा शुरू होने जा रही है कि मृतक के बारे में रिकोर्ड की कापी डीसी कार्यालय में होनी चाहिए या फिर इसे एक अलग तरह की घटना मानते हुए अनदेखा कर दिया जाए। इस बारे में एसडीएम की पीएम कांता ने बताया कि एसडीएम सांसद के दौरे पर हैं व शिकायत को लेकर डायरी नंबर दे दिया गया है। इस मामले की जांच के लिए लिखा जाएगा व शिकायतकर्ता को फिर से शुक्रवार को बुलाया गया है।

पुराने वोटर कार्ड से ही होता रहा बंदूक का लाइसेंस रिन्यू

डीसी कार्यालय से सन 2010 व 13 में उसकी बंदूक का लाइसेंस भी रिन्यू हो चुका है। उस समय किसी ने नहीं देखा कि बंदूकधारी व्यक्ति को बहादुरगढ़ एसडीएम कार्यालय से मृतक घोषित किया हुआ है व वोटर लिस्ट से इसी आधार पर नाम भी काटा जा चुका है। वहां भी पुराने वोटर कार्ड देखकर बंदूक के लाइसेंस को रिन्यू कर दिया गया। इसी तरह से पुराने वोटर कार्ड के आधार पर ही उसे वाहन चलाने का लाइसेंस भी बना दिया गया। सन 2012 में उन्होंने अपना जीवन बीमा भी करवाया है। ऐसे में यदि उन्हें कुछ हो जाता तो कागजों में तो वह सन 2004 में ही मर चुका था। उसका प्रमाण पत्र भी एसडीएम कार्यालय द्वारा जारी किया जा चुका है।

दस साल पहले भेजे प्रमाण पत्र को समझा मजाक

आसौदा टोडरान निवासी विनोद कुमार ने बताया कि एसडीएम कार्यालय से जारी उसके मृतक होने का प्रमाण पत्र देखकर वह हैरान हो गया था। यह प्रमाण पत्र 28 सितंबर 2004 को एसडीएम कार्यालय बहादुरगढ़ से जारी किया गया है। वह डाक द्वारा ही घर पहुंचाया गया था। तब परिवार के सदस्यों को चिंता तो हो गई, लेकिन बाद में इसे मजाक में मान लिया गया। अब उसने गांव में अन्य लोगों के पहचान पत्र बनवाने के लिए फार्म भरे तो उसे पता चला कि मृतक घोषित किए जाने के कारण वोटर लिस्ट से उसका नाम ही काट दिया गया है। अब इसे 2004 में घर पहुंचे अपने मृतक प्रमाण पत्र की अहमियत के बारे में पता तो वह इस प्रमाण पत्र को रद्द करवाने के लिए कार्रवाई की भी मांग कर रहा है।