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केस और गिरफ्तारी भी नहीं तोड़ पाई कर्मचारियों की एकता
भास्कर न्यूज - नारनौल
प्रशासन के लाख प्रयास के बाद भी इस बार कर्मचारी यूनियनों की एकता और तालमेल इस कदर एक जुट रहा कि उसे तोडऩे के लिए प्रशासन को रात अंधेरे में कर्मचारी नेताओं के घर दबिश देकर उन्हें पकडऩा पड़ा और केस दर्ज करने पड़े। बुधवार रात दो कर्मचारी नेता उनके घरों से उठाए गए, जेई स्तर के नेताओं पर केस दर्ज किए गए। उसके बावजूद प्रशासन हड़ताल को पूरी तरह तोडऩे में सफल नहीं हो पाया।
कर्मचारी यूनियन की एक जुटता को तोडऩे के लिए दिन में तीन बार दफ्तरों में उपस्थिति की प्रशासन की योजना जब धराशायी हो गई। बिजली और पानी की सप्लाई 40 घंटे तक भी शुरू नहीं हो पाई तब चंडीगढ़ से आए चीफ सेक्रेटरी के आदेश के बाद प्रशासन बुधवार रात साढ़े आठ बजे कर्मचारियों के चक्रव्यूह से जिले की जनता को निकालने में सक्रिय हुआ।
इसकी पटकथा बुधवार रात नौ बजकर 40 मिनट पर ही तैयार कर दी गई थी, जब लघु सचिवालय, ऑफिसर्स कॉलोनी की लाइट भी गुल हो गई। दिन के समय एक्सईएन रंजन राव बिजली निगम यूनियन के एक धड़े की सहायता से फाल्ट ठीक करने में लगे रहे। बुधवार दिनभर जब लाइट नहीं आई तो रात डीसी, एसपी, एक्सईएन, डीएसपी व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने अंधेरे में डूबे शहर का दौरा किया। जब यह टीम पावर हाउस पहुंची तो वहां बिजली कर्मचारियों की कॉलोनी में जगमगाहट दिखाई दी। इसके बाद कुछ कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए।
जानकारी के मुताबिक, रात को ही जेई सुभाष रोहिल्ला, अशोक यादव, हनुमान यादव और सिटी लाइनमैन राजेंद्र के अतिरिक्त फोरमैन पूर्णचंद और लाइनमैन शिंभूदयाल शर्मा के खिलाफ सिटी पुलिस ने केस दर्ज किया। पूर्णचंद और शिंभूदयाल को उनके घर से गिरफ्तार करने के लिए पुलिस टीम भेजी गई। उन पर लाइन डिस्टर्ब करने का आरोप लगाया गया।
आईटीआई से बुलाए चार तकनीशियन
आईटीआई इलेक्ट्रिकल विभाग के चार अनुभाग निदेशकों के भरोसे पावर हाउस में आए फाल्ट को दूर करने की कार्रवाई शुरू हुई। रात नौ बजे ऑफिसर्स कॉलोनी की बिजली ठीक हुई। दो बजे हुडा सेक्टर और हाउसिंग बोर्ड व रात ढाई बजे सिटी वन और सिटी टू की लाइनें चालू की गईं। वह बात अगल रही कि सुबह आठ बजे जब कर्मचारी नेता एकत्र होने शुरू हुए और उन्हें रात को प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी मिली तो उन्होंने फिर से सिस्टम में खामियां पैदा कर दीं। इससे शहर की लाइट फिर गुल हो गई।