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अशक्त बच्चों की कार्यशैली समझने के लिए मंथन
भास्कर न्यूज - नारनौल
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का खान-पान कैसा हो? वेशभूषा उनकी सुविधा के अनुसार कैसे पहनाई जाए? उनके अनुरूप पाठ्य सामग्री कैसी हो? ऐसी की कुछ जानकारी गुरुवार को अशक्त ‘विशेष आवश्यकता वाले बच्चों’ को घरों में जा कर शिक्षा कार्य करने वाले विशेष वालंटियर्स को दी गई। अवसर रहा, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सर्व शिक्षा अभियान के तहत लगे पांच दिवसीय शिविर का।
गुरुवार को शिविर का उद्घाटन करते हुए डीपीसी मुकेश लावणिया ने वालंटियर्स को कहा कि हमें अशक्त बच्चों में न केवल शिक्षण अपितु खान-पान, वेशभूषा, खुद की सफाई एवं स्वयं भोजन खाने की विधि और अपने आस-पास के लोगों को पहचानने का भाव पैदा करना चाहिए, जिससे विशेष आवश्यकता वाले बच्चों में आत्मविश्वास पैदा हो सके। उन्होंने वालंटियर को प्रत्येक बच्चे के साथ चाहे वो मंद बुद्धि या चलने-फिरने में अशक्त या जो विद्यालय में नहीं जा सकते, उनको उनकी परिस्थितियों के अनुसार घर पर जाकर ही शिक्षण, आचार व्यवहार और स्वयं के कार्य करने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। इस मौके पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य कृष्ण सिंह बालवान, राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य पवन भारद्वाज, एपीसी प्रेमसिंह ने भी विचार रखे।