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जच्चा भूखे पेट, पंजीरी-खिचड़ी डकार रहा स्वास्थ्य विभाग

8 वर्ष पहले
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शिवकुमार गौड़ - जींद
जच्चा भूखे पेट जबकि पंजीरी और खिचड़ी स्वास्थ्य विभाग पचा रहा है। जी हां, सामान्य अस्पताल में बच्चों को जन्म देने वाली महिलाओं ((जच्चा)) के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई जनन शिशु सुरक्षा योजना दम तोड़ती नजर आ रही है।
यहां ऐसी महिलाओं को खाने-पीने के लिए कुछ भी नहीं दिया जा रहा है। योजना के तहत मिलने वाली ((खाने-पीने)) राशि का कहां और कैसे उपयोग किया जा रहा है, महिलाओं को इसके बारे में भी जानकारी नहीं है। जबकि अकेले सामान्य अस्पताल जींद में औसतन प्रति माह 350 के आसपास महिलाओं की डिलीवरी हो रही है, लेकिन लापरवाही के कारण महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिल रहा।




कुछ नहीं मिलता

घर से लाते हैं खाना

नहीं मिला राशन

मैंने सोमवार को बेटे को जन्म दिया है। यहां खाने-पीने के लिए कुछ नहीं मिल रहा है। बस घर से ही खिचड़ी आदि लाकर खिलाई जा रही है।

-सुनीता देवी, निवासी गुरसर।

सोमवार सुबह ९ बजे बेटी को जन्म दिया। उसी दिन से प्रसूति वार्ड में एडमिट हूं। सास धनपति ने बताया कि बहू को खाने के लिए कुछ नहीं दिया जा रहा है।

-पूजा, निवासी, रामगढ़।

मुझे मंगलवार दोपहर को सामान्य अस्पताल में सिजेरियन से बेटा पैदा हुआ है। अस्पताल की ओर से मुझे कोई भी खाने-पीने का राशन नहीं मिला है।

-सोनिया, ऐचरां कलां।

रोजाना दी जा रही डाईट

सामान्य अस्पताल में डिलीवरी वाली महिलाओं को 100 रुपए प्रति दिन डाईट दी जा रही है। मैं आज पंचकूला मीटिंग में हूं और कल जाकर सारे मामले की जानकारी लूंगा। उसके बाद ही सारी रिपोर्ट दे पाऊंगा।

-डॉ. धनकुमार, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, सामान्य अस्पताल, जींद

यह है जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम

सरकार द्वारा महिलाओं की सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित डिलीवरी कराने व उनके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम शुरू की हुई है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं की सरकारी अस्पतालों व केंद्रों पर डिलीवरी कराने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए आशा वर्कर भी नियुक्त की गई। आशा वर्करों को इसकी एवज में प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। इसके तहत सरकारी अस्पताल में नॉर्मल डिलीवरी होने पर प्रसव महिला को 48 घंटे तक तथा सिजेरियन से बच्चा पैदा करने वाली महिला को एक सप्ताह तक अस्पताल में दाखिल रखकर उसके खानपान की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। प्रति महिला पर प्रतिदिन 100 रुपए खर्च करने का प्रावधान है। खानपान में डायटीशियन के हिसाब से महिला को पंजीरी, गूंद के लड्डू, दूध, फल, ब्रेड, खिचड़ी आदि दिया जाना होता है। इसके लिए हर साल लाखों रुपए का बजट एक जिले के लिए होता है।

ञ्चसुबह का नाश्ता : 300 एमएल दूध, चार ब्रैड या दो डबल रोटी।

ञ्च10 बजे: 100 ग्राम मूंगफली के दाने।

ञ्च1.30 बजे : चार चपाती या राइस, दाल, हरी सब्जी, दही व स्लाद।

ञ्च7.30 शाम को : दलिया या खिचड़ी अथवा चार चपाती, दाल,सब्जी व सलाद।

ञ्चरात नौ बजे : मिल्क 250 मिली.

नोट: आंकड़े जच्चा को दी जाने वाली खुराक के हिसाब से हैं।

रोजाना के हिसाब से यह है डाईट चार्ट ((प्रति महिला))

डाईट चार्ज बना पर रसोई में नहीं जला चूल्हा

पिछले दिनों सामान्य अस्पताल में तैनात डाइटीशियन की ओर से प्रसव के दौरान महिलाओं के लिए डाईट चार्ट तो तैयार किया गया, लेकिन आज तक वह लागू नहीं हो पाया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल की रसोई को चलाने के लिए तीन कुकों की दिसंबर माह में नियुक्ति भी की गई, मगर उसके बाद भी यहां पोषाहार ((खाना)) नहीं पका है। पिछले अक्टूबर-नवंबर माह में बाहर से भोजन तैयार कराकर ऐसी महिलाओं को कुछ दिनों तक खिलाया गया था।