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आखिरकार जच्चा महिलाओं को मिली पिन्नी व दूध
भास्कर न्यूज - जींद
सामान्य अस्पताल में डिलीवरी कराने वाली जच्चा महिलाओं को आखिरकार पिन्नी व दूध मिलना शुरू हो गया है। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत प्रतिदिन प्रति महिला को 100 रुपए के हिसाब से मिलने वाली राशि की एवज में पिछले दिनों जच्चाओं को कुछ भी नहीं दिया जा रहा था। भूखे पेट ही महिलाएं बेड पर लेटी रहती थीं और परिजनों द्वारा ही जैसे-तैसे कर उन्हें हलका फुल्का पोषाहार देने की जुगत की जा रही थी।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जच्चाओं को पंजीरी व खिचड़ी जैसी डाइट देने के लिए विभाग की स्कीम का भास्कर ने इंवेस्टिगेशन किया तो पता चला कि महिलाओं को खाने व पीने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कुछ दिया ही नहीं जा रहा। योजना की राशि कहां और कैसे इस्तेमाल हो रही है इसका भी कोई पता नहीं। इस मुद्दे को भास्कर ने ‘जच्चा भूखे पेट, खिचड़ी-पंजीरी नहीं दे रहा विभाग’ समाचार प्रकाशित किया था।
अब हरकत में आया विभाग
खबर छपने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया। सिविल सर्जन ने भी इसका जायजा लिया और जैसे तैसे कर डाइट के तौर पर जच्चा महिलाओं को पिन्नी व दूध देना शुरू कर दिया। साथ ही अस्पताल की रसोई को चलाने की पूरी तैयारी विभाग द्वारा की जा रही है।
यह है त्र100 का डाइट चार्ट
सुबह का नाश्ता : 300 एमएल दूध, चार ब्रेड या दो डबल रोटी।
10 बजे : 100 ग्राम मूंगफली के दाने।
1:30 बजे : चार चपाती या राइस, दाल, हरी सब्जी, दही व सलाद।
शाम 7:30 बजे : दलिया या खिचड़ी अथवा चार चपाती, दाल, सब्जी व सलाद।
रात 9:00 बजे : दूध 250 मिली
बाजार से मंगवाए जा रहे खाद्य पदार्थ
पिछले दिनों सामान्य अस्पताल में तैनात डाइटीशियन की ओर से प्रसव महिलाओं के लिए जो डाइट चार्ट तैयार किया हुआ है उसके हिसाब से जच्चा महिलाओं को पोषाहार नहीं मिल रहा है। बस विभाग ने पिन्नी व दूध देकर इसकी इतिश्री की है। इतना ही नहीं, विभाग द्वारा अस्पताल में पांच कुकों की नियुक्तिकी गई है। बावजूद इसके अस्पताल की रसोई नहीं शुरू हो पाई है। यह तो साफ है कि जब तक अस्पताल की रसोई शुरू नहीं हो पाती तब तक महिलाओं को रेडिमेड चीजों से पेट भरना होगा।
२३ जनवरी के अंक में प्रकाशित खबर