महिला ग्राम सभाएं रोकेंगी भ्रूणहत्या
शिवकुमार गौड़ - जींद
बेटियां गर्भ में न मारी जाएं और उन्हें भी जीने का अधिकार मिले। घर आंगन में बेटियों की किलकारियां गूंजे। इसके लिए सरकार ग्रामीण महिलाओं व पंचायतों का सहारा लेगी। न्यूनतम शिशु लिंगानुपात वाले गांवों से चिंतित सरकार अब कन्या भ्रूणहत्या रोकने की कड़ी में विशेष कदम उठाएगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्रालय व पंचायती राज मंत्रालय के प्रयास से शिशु लिंगानुपात में सुधार लाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर थीमेटिक कन्वरजेंस पायलट प्रोजेक्ट फॉर इंप्रूविंग चाइल्ड सेक्स रेसो का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत हरियाणा के दो जिले झज्जर व जींद में पंचायती राज मंत्रालय से जारी बिंदुओं पर विशेष महिला ग्राम सभा आयोजित करके गांव में लिंगानुपात में सुधार के लिए कार्य किया जाना प्रस्तावित है।
जिले में लिंगानुपात ९३५
प्रोजेक्ट के तहत न्यूनतम शिशु लिंगानुपात वाले गांव में 5-5 महिलाओं के ग्रुप बनाए जाएंगे। ये ग्रुप गांव की गर्भवती महिलाओं पर कड़ी नजर रखेंगे। खासकर जिस महिला को पहले बेटी ही हो, उसकी सारी गतिविधि पर ये ग्रुप अपनी निगाह बनाए रखेंगे। साथ ही गर्भवती महिलाओं की सास को भी बेटा-बेटी में कोई अंतर नहीं है इसका पाठ पढ़ाएंगी। जींद जिले का लिंगानुपात 935 है।
हर हाल में बेटियों को बचाना होगा
कन्या भ्रूणहत्या जघन्य पाप है। जब तक गर्भ में बेटियों को मारा जाता रहेगा तब तक समाज में असमंजस की स्थिति रहेगी। इसलिए हमें हर हाल में बेटियों को बचाना होगा। लिंगानुपात अंतर की खाई को पाटकर ही स्वच्छ समाज का निर्माण कराया जा सकता है।
-बलजीत नगूरां, समाजसेवी।
बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं है। बेटी होने का पता लगने पर गर्भपात कराना गलत है, क्योंकि इससे हम नन्ही जान की हत्या करने का पाप करते हैं। बेटियां मारी जाती रहेंगी तो बहुएं कहां से आएंगी। इसलिए समाज को जागरूक होना होगा।
- केसी शर्मा, सदस्य, भाविप।
50 गांवों में लिंगानुपात ८०० से भी कम
महिलाओं की होगी अहम भागीदारी
प्रोजेक्ट के पूरी तरह से लागू होने से गांव स्तर पर महिला ग्राम सभाएं आयोजित कर बेटियों को बचाने के लिए समाज के सकारात्मक सोच के लोगों को आगे लाकर न्यूनतम शिशु लिंगानुपात वाले गांव में गिरते लिंगानुपात को रोकने के बारे में जागरूक किया जाएगा। बेटा-बेटी के अंतर की सोच का बदलने का प्रयास इन सभाओं के माध्यम से किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे सबसे ज्यादा भूमिका महिलाएं निभा सकती हैं, इसलिए इन सभाओं में महिलाओं की ही भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पंचायतों से इसके लिए विशेष सहयोग मांगा गया है। इसके लिए पहले से ही सरकार सेक्स रेसो के सुधार में अहम रोल निभाने वाली ग्राम पंचायतों को सम्मानित भी कर रही है।
जनगणना 2011 के आंकड़ों में सामने आया कि जींद जिले के ऐसे 50 गांव पाए गए, जिसमें 0-6 वर्ष आयुवर्ग का लिंगानुपात एक हजार के पीछे 800 से भी कम पाया गया, जो चिंतनीय है। सरकार द्वारा इन आंकड़ों के मद्देनजर न्यूनतम शिशु लिंगानुपात वाले गांव में इस अंतर को दूर करने के लिए जागरूकता प्रचार कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
गांवों की ब्लॉक वाइज स्थिति
नरवाना ब्लॉक : पीपलथा, दातासिंह वाला, लोन, अमरगढ़, खरड़वाल, सिंघवाल व बडऩपुर।
उचाना ब्लॉक : सुदकैन कलां, तारखां, घसो कलां, झील, टोहाना खेड़ा, दरौली खेड़ा, भौंगरा, अलीपुरा व मांडीकलां।
अलेवा ब्लॉक : दुड़ाना, बधाना, हसनपुर, शामदो व चूहड़पुर।
जींद ब्लॉक : बरसोला, झांझखुर्द, किशनपुरा, जलालपुरा खुर्द, संगतपुरा, ईंटल कलां, राजपुरा, रामराय, बहबलपुर, बिरौली, रधाना, मनोहरपुर, लोहचब व सिवाहा।
जुलाना ब्लॉक : रामकली, अनूपगढ़, गोसाईंखेड़ा, जैजैवंती, खरैंटी, खेड़ा बख्ता, देवरड़, किलाजफरगढ़, पोली व अकालगढ़।
सफीदों ब्लॉक : मोरखी, गांगोली, जामनी, रजाना व सिंघाना।
आगे क्या : अराजकता से मिलेगा छुटकारा
अगर गर्भ में पल रही सभी कन्या शिशुओं को जन्म लेने दिया तो इससे लिंगानुपात की असमानता दूर होगी और समाज में महिलाओं पर बढ़ रहे अत्याचारों में कमी आएगी। बिना शादी के युवाओं के पथभ्रष्ट होने व अपराध की दुनिया में कदम रखने जैसी समस्या से भी कुछ राहत मिल सकती है। अगर लड़कियों का सेक्स रेसो समान होगा तो युवाओं को बाहरी राज्यों से दुल्हन लाने की जहमत नहीं उठानी पड़ेगी। इससे समाज में फैली अराजकता से भी कुछ हद तक छुटकारा पाया जा सकता है।
बेटियां बचाने के लिए न्यूनतम 50 गांवों को किया चिन्हित, गर्भवती महिलाओं पर रहेगी कड़ी नजर