पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • प्यास बुझाने को चाहिए नहरी जलघर

प्यास बुझाने को चाहिए नहरी जलघर

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जितेंद्र बूरा - जींद
शहर में जमीनी पानी खारा हो गया है। टीडीएस की मात्रा लगातार बढ़ रही है। पानी का सेवन करने से सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। शहर के बीचों-बीच हांसी ब्रांच नहर गुजर रही है और अब नहरी आधारित जलघर की जरूरत बढ़ गई है। हुडा कॉलोनियों के लिए हुडा नहरी आधारित जलघर बना चुका है। हालात को देखते जलापूर्ति विभाग भी इसके लिए प्रपोजल तैयार कर रहा है।
कैसे पीएं खारा पानी
पेयजल सप्लाई से यहां लोगों का विश्वास उठ रहा है। स्वच्छ जल पीने के इच्छुक लोग अब घरों में आरओ लगवा रहे हैं या फिर कैंपर का पानी खरीदकर पी रहे हैं। जींद शहरवासी भूमिगत जल पर आधारित ट्यूबवैलों की सप्लाई से पानी पी रहे हैं। लगातार जमीनी पानी के दोहन से पानी की क्वालिटी खराब हो रही है। तीन साल पहले तक शहर के ट्यूबवैल का पानी का टीडीएस 300 से 500 था। अब यह नहरी क्षेत्र क ो छोड़कर अन्य जगह 800 से एक हजार तक पहुंच रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी मानता है कि 1500 टीडीएस से अधिक पानी पीने लायक नहीं है।
हुडा ने बनाया नहरी जलघर : इस समय शहर की जनसंख्या दो लाख के करीब पहुंच गई है। इसमें से करीब 1 लाख 25 हजार लोगों को जलापूर्ति एवं स्वच्छता अभियांत्रिकी विभाग पानी मुहैया करवाने में जुटा है। इसके लिए विभाग ने शहर में 45 ट्यूबवैल व 4 बूस्टिंग स्टेशन लगवाए हुए हैं। बाकी हुडा के अधीन कॉलोनियों के 55 हजार लोग 10 ट्यूबवैलों से पानी ले रहे हैं। हुडा ने अपनी कॉलोनियों में स्वच्छ और मीठा पानी देने के लिए 30 करोड़ की लागत से नहरी आधारित जलघर व जल स्टोरेज टैंक बना लिया है।
हुडा कॉलोनी वासियों को तो स्वच्छ पानी मिल गया, लेकिन अब चिंता जलापूर्ति विभाग की सप्लाई की है। उधर, सृष्टि फाउंडेशन के प्रधान एमएल गुप्ता का कहना है कि पानी हर इंसान की जरूरत है। शहर में भूमिगत पानी खारा हो रहा है।