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स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू न की तो 7 को देशभर में रोकेंगे रेल
भास्कर न्यूज - जींद
किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी मूल्य दिलवाने के लिए डॉ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करवाने की मांग को लेकर भाजपा किसान मोर्चा ने गुरुवार को लघु सचिवालय परिसर के बाहर गोहाना रोड पर धरना दिया और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
किसान मोर्चा कार्यकर्ताओं ने कहा कि केंद्र की यूपीए सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को एक सप्ताह में लागू नहीं किया तो 7 फरवरी को जींद समेत पूरे देश में किसानों को साथ लेकर भाजपा किसान मोर्चा के कार्यकर्ता रेल रोकने का काम करेंगे।
सुबह ही भाजपा किसान मोर्चा कार्यकर्ता लघु सचिवालय परिसर के बाहर धरना देकर बैठ गए थे। भाजपा के जिला प्रधान डॉ. ओमप्रकाश पहल तथा भाजपा किसान मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य जवाहर सैनी की अध्यक्षता में किसान मोर्चा कार्यकर्ताओं ने लगभग 3 घंटे तक धरना दिया। जवाहर सैनी और दूसरे नेताओं ने कहा कि किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी समर्थन मूल्य दिलवाने के लिए केंद्र सरकार से स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट जल्द लागू करने को कहा है, जिस पर केंद्र सरकार पिछले लगभग 7 साल से कुंडली मारे बैठी है।
उन्होंने कहा कि खुद यूपीए सरकार ने स्वामीनाथन आयोग का गठन किया था ताकि किसानों को उनकी फसलों के लाभकारी समर्थन मूल्य दिए जा सकें। यह रिपोर्ट साल 2007 में केंद्र सरकार को सौंप दी गई थी। इस रिपोर्ट में यह सिफारिश की गई है कि किसान की फसल की लागत में उसका 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर समर्थन मूल्य तय किया जाए।
सैनी ने कहा कि इस रिपोर्ट के लागू नहीं होने से देश में हर साल लाखों किसान कर्ज के मारे आत्महत्या कर रहे हैं। कांग्रेस के 9 साल के शासनकाल में देश में 1.45 लाख किसानों ने आत्महत्या की है।
सीएम की सिफारिशें भी नहीं लागू
सैनी ने कहा कि केंद्र सरकार ने हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के नेतृत्व में बनी 5 मुख्यमंत्रियों की कमेटी की उस सिफारिश को भी लागू नहीं किया है, जिसमें प्राकृतिक आपदा में किसान की फसल नष्ट होने की सूरत में उसे 10 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजे की बात कही गई है। यह रिपोर्ट भी केंद्र सरकार के पास साल 2010 से लंबित है। खाद के बढ़े हुए दाम वापस लेने, नदी जोड़ों योजना लागू करने आदि मांगें उठाईं। इस दौरान ईश्वर उझाना, शमशेर सिंह अहलावत, अमरपाल राणा, तलविंद्र रसीदां, योगेश पूनिया, पुरुषोत्तम शर्मा, राममेहर सांगवान, जरनैल सिंह, ऋषि मेहंदीरत्ता, रवि सिंगला, तरुण अरोड़ा भी मौजूद रहे।
लागत भी नहीं मिलती
उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट लागू होती तो किसान को गेहूं का समर्थन मूल्य 2100 रुपए और धान का 2050 तथा गन्ने का 375 रुपए प्रति क्विंटल मिलता और इसमें 50 प्रतिशत किसान का लाभ भी जुड़ता। आज स्थिति यह है कि किसान को गेहूं और धान के मामले में उसका लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा है।