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कुष्ठ रोग मुक्त होगा जिला, ११३ रोगियों का पूरा हुआ इलाज

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - जींद
जिले में कुष्ठ रोग पर फतह पाने से स्वास्थ्य विभाग एक कदम दूर है। जिले में मात्र 13 कुष्ठ रोगी ही बचे हैं, जिनका इलाज चल रहा है। कुष्ठ रोग बीमारी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुहिम चली हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस पर काबू पाने के लिए प्रयासरत है। गुरुवार को कुष्ठ रोग दिवस पर सिविल सर्जन डॉ. जेएस ग्रेवाल, कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. गोपाल गोयल, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. राजेश भोला ने अपनी टीम के साथ नहर के पास कुष्ठ रोगियों की बस्ती में जाकर उन्हें दवाइयां, बीमारी संबंधित सहयोगी चीजें दी और रोग से बचाव की जानकारी भी दी।
126 कुष्ठ रोगी मिले
अब तक जिले में 126 कुष्ठ रोगी सामने आए थे। इनमें 44 व्यक्ति ही ऐसे हैं जोकि जिले के मूल निवासी हैं। बाकी 82 कुष्ठ रोगियों में बाहर से यहां मेहनत मजदूरी करने आए व्यक्ति हैं। ये सब ईंट-भट्ठों, फैक्ट्रियों आदि में काम करने वाले हैं और अन्य प्रदेशों से यहां आए हुए थे। 113 रोगियों का इलाज पूरा हो चुका है। जिनका इलाज पूरा हो चुका है, वे बेहतर जीवन जी रहे हैं। पूरे जिले में मात्र 13 ही व्यक्ति ऐसे रह गए हैं जोकि कुष्ठ रोग से प्रभावित हैं। कुष्ठ रोग पर काबू पाने में लगे स्वास्थ्य विभाग को नए आंकड़ों ने उत्साह से भर दिया है। सिविल सर्जन डॉ. जेएस ग्रेवाल ने कहा कि यह कोई अछूत रोग नहीं है। सही इलाज लिया जाए तो बीमारी ठीक हो जाती है।
एमडीटी से चल रहा इलाज
देश में कुष्ठ रोग पर नियंत्रण पाने के लिए वर्ष 1955 में राष्ट्रीय कुष्ठ रोग नियंत्रण प्रोग्राम ((एनएलईपी)) शुरू किया गया। इस दौरान 10 हजार के पीछे 25.4 केस थे। इसके बाद वर्ष 1983 में कुष्ठ रोग बहु औषधि इलाज ((एमडीटी)) शुरू किया गया और यह सफलता प्राप्त करने लगा। डब्ल्यूएचओ के अनुसार अगर 10 हजार में से एक प्वाइंट से कम केस हैं तो समझो स्थिति सफलता की ओर है। देश में मौजूदा समय की स्थिति 10 हजार के पीछे 0.3 की है। कुष्ठ रोगियों को दो श्रेणी में बांटा गया है। इनमें पहले एमबी और दूसरे पीबी होते हैं। एमबी के लिए एक साल और पीबी के लिए छह महीने का इलाज होता है।




कुष्ठ बहुत ही कम संक्रामक रोग है जो रोगाणुओं यानि बैक्टीरिया के कारण होता है। यह मुख्य रूप से चमड़ी और तंत्रिकाओं को प्रभावित करता है। यह रोग धीरे-धीरे बढ़ता है तथा इसकी औसतन उदभवन अवधि तीन वर्ष है। कुष्ठ किसी भी आयु में स्त्री व पुरुष, किसी को भी हो सकता है। एमडीटी द्वारा कुष्ठ रोग 6 से 12 माह में पूरी तरह ठीक हो जाता है। चमड़ी पर ऐसे दाग-धब्बे जिनमें सुन्नपन हो, लालिमा लिए हुए अथवा चमड़ी के रंग के दाने-गठानें या चिकनी चमकदार फूली हुई चमड़ी जिसमें सुन्नपन नहीं आया है, कुष्ठ रोग के लक्षण हैं।

क्या है कुष्ठ रोग

कुष्ठ रोग दिवस