ईख के बाद प्याज की तैयारी
भास्कर न्यूज - बेरी
बेरी क्षेत्र में ज्यादातर किसान सीजन फसल गेहूं, बाजरा व ईख की पैदावार करते हैं। हालांकि बीते कुछ वर्षों में नष्ट हुई फसलों के कड़वे अनुभवों को देखते हुए क्षेत्र के किसानों ने अब गैर पारंपरिक खेती की ओर कदम बढ़ाए हैं। इनमें प्याज की खेती क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही है। किसान इस नकदी फसल को लेकर उत्साह में हैं।
अपनी फसल के उचित दाम न मिलने के कारण अब बेरी के किसानों ने अपना रुख प्याज की तरफ कर लिया है। किसान धीरे-धीरे प्याज की खेती की ओर अग्रसर होने लगे हैं। एक तो प्याज के दामों में उछाल व दूसरा प्रतिकिलो के हिसाब से भी प्याज अन्य फसलों से अधिक दाम की बिक्री होने के कारण किसान प्याज की खेती करने लगे हैं। गत वर्ष प्याज की कीमत 100 रुपए किलो तक पहुंच गई। बेरी के किसानों के लिए उस समय प्याज की खेती फायदे का सौदा साबित हुई। किसानों का कहना है पिछले वर्ष भी कुछ किसानों ने प्याज की फसल लगाई थी, जो 50 से 55 रुपए किलो बिकी थी। ऐसे में बेरी के किसानों ने प्याज की खेती करना शुरू कर दिया है। प्याज से दोहरा फायदा उठाने के लिए किसान कच्ची प्याज को भी मंडी में बेच कर मुनाफा उठाते हैं। बची हुई प्याजों को जमीन से पूरी साइज की होने पर उखाड़ा जाता है।
यह कहना है किसानों का
किसानों का कहना है कि प्याज की खेती तीन माह में तैयार हो जाती है। किसान समेर, जयभगवान, कुलदीप, अनिल नंबरदार, रामपाल, सुनील नंबरदार, रामचंद ने बताया कि वे अब ईख की फसल काटने के बाद प्याज की फसल लगा रहे हैं, जो काफी फायदे का सौदा होगा।
किसानों ने गैर पारंपरिक खेती की ओर बढ़ाए कदम