पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • रोडवेज ने दिखाई सख्ती, अब नेता करेंगे ड्राइवरी कंडेक्टरी

रोडवेज ने दिखाई सख्ती, अब नेता करेंगे ड्राइवरी-कंडेक्टरी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
देवेंद्र शुक्ला - झज्जर
हरियाणा रोडवेज के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब महकमा विभिन्न कर्मचारी यूनियनों से जुड़कर नेता बने अपने कर्मचारियों पर नजर रख रहा है। इनमें अधिकांश ड्राइवर व कंडेक्टर हैं। महकमे का स्पष्ट आदेश है कि वे नेता बाद में और कर्मचारी पहले हैं। लिहाजा उनका काम कंडेक्टरी और ड्राइवरी करना है, वो ये काम नहीं करेंगे तो नपेंगे।
सूत्रों के अनुसार दो बार की पूर्ण सफल हड़ताल और हर बार रोडवेज को लाखों के नुकसान को देखते हुए महकमे ने अब रोडवेज में बढ़ते नेताओं पर ही नकेल कसना शुरू कर दी है। मौजूदा हड़ताल के बाद ऐसे सभी नेताओं की डेली रिपोर्ट जिला मुख्यालय से प्रदेश मुख्यालय मंगाई जा रही है। रोडवेज के महाप्रबंधकों को स्पष्ट निर्देश हैं कि वे अपने सुपरविजन में टीम बनाकर विभिन्न कर्मचारी संगठनों के नेताओं पर नजर रखें। डेली रिपोर्ट बनाए कि जिसके पास जो पद हैं उसे वो निभा रहा है या नहीं।
ऐसा पहली बार हुआ है जब सरकार का समर्थन या विरोध करने वाली सभी कर्मचारी यूनियनों के पदाधिकारियों की डेली रिपोर्ट बन रही है। यह भी बता दें कि झज्जर में रोडवेज के निशाने पर नेता व यूनियनों से जुड़े 46 सदस्य हैं। हालांकि परिवहन विभाग के डीजी ने यह भी ढील दी है कि जो नेता, पदाधिकारी, यूनियन सदस्य बीमारी के कारण छुट्टी पर हैं। किसी जरूरी काम से अवकाश पर है उसकी ड्यूटी डेली रिपोर्ट की लिस्ट में शुमार न की जाए। अब महकमे के इस ताजा फरमान के बाद कर्मचारी बने नेताओं में हड़कंप मचा हुआ है।
समर्थन देकर भी
फंसी इंटक
खास बात यह है कि रोडवेज की हड़ताल में पहले इंटक भी साथ रही। इंटक ने हड़ताल को सफल बनाने के लिए गेट मीटिंग भी। हालांकि एन वक्त पर इंटक के एक गुट के राज्य प्रधान अनूप सिंह ने सरकार से उनकी मांगों का समझौता होने के दावे का बयान देकर हड़ताल नहीं करने का फैसला लिया। इस कारण इंटक के ही एक अन्य गुट के राज्य प्रधान जयवीर कादियान ने भी हड़ताल वाले दिन ही सरकार का साथ देने का अहसास जताया। हालांकि दोनों गुटों के नेता झज्जर से 13 बसें ही चलवा सके। सरकार को समर्थन देने के प्रयास के बाद भी अब रोडवेज विभाग ने दोनों
ही इंटक यूनियनों के नेताओं को भी कटघरे में लिया है।




मुख्यालय ने कर्मचारी यूनियन नेताओं की बढ़ती संख्या पर कसी नकेल