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निजी अस्पतालों की तर्ज पर ओपीडी पर्ची पर मिलेगा टोकन नंबर
भास्कर न्यूज - झज्जर
सिविल अस्पताल में अब चिकित्सा सुविधा पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत कर दी गई है। निजी अस्पताल की तर्ज पर ओपीडी पर्ची पर कंप्यूटर नंबर डलेगा। यही नंबर ओपीडी लेने वाले डाक्टर की टेबल और बाद में दवा खिड़की तक पहुंचेगा। इस मानीटरिंग के साथ ही मरीज स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में दर्ज हो जाएगा।
विभाग के रिकार्ड में दर्ज होगा मरीज
बता दें कि अब भी तक सिविल अस्पताल की व्यवस्था थी कि सीरियल नंबर ओपीडी पर्ची पर डाला जाता था। कभी-कभी भीड़ अत्यधिक होने पर ओपीडी पर्ची पर सिर्फ मरीज का नाम और उम्र ही लिख दी जाती थी। इसके बाद इस पर्ची के आधार पर लाइन लगाकर वह दवा लेता था।
अब कंप्यूटराइज्ड सुविधा के साथ जो टोकन नंबर ओपीडी पर्ची पर लिखा जाएगा,वही नंबर का मरीज ओपीडी में डाक्टर के पास पहुंचेगा। इसी प्रकार डाक्टर से मिलने के बाद इसी टोकन नंबर के आधार पर उसे दवा खिड़की से दवाएं मिलेगी।
यही नहीं यह टोकन नंबर ऑन लाइन भी होगा। इससे पता चलेगा कि दवा स्टोर में कितनी दवा बाकी है, ताकि उस हिसाब से दवा का स्टाक रखा जा सके।
चार खिड़कियों पर
मिलेगी दवा
यह भी बता दें कि पहले सिविल अस्पताल में दो दवा खिड़की थी, जिसे बढ़ाकर चार कर दिया गया है। यह भी दावा किया जा रहा कि ओपीडी पर्ची पर टोकन नंबर खिड़की के बाहर ही मरीज को दिया जाएगा।आमतौर पर खिड़की के अंदर आकर ओपीडी पर्ची लेने वालों का काम अब अंदर से नहीं हो सकेगा। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग अपने इस नए प्रयोग पर कितना सफल होता है।
इन चार मसलों पर दिए टिप्स
जिला स्वास्थ्य विभाग ने समस्त जिले के लिए जो 9 मोबाइल टीम बनाई है उनके लिए चार सूत्रीय उद्देश्य भी बनाए गए हैं। इसी आधार पर हेल्थ टीम को बच्चों को चिकित्सा सहायता देनी है। एनआरएचएम के एमडी डा. राकेश गुप्ता ने कहा कि जिन चार मामलों में फोकस करना है उनमें जन्म के साथ ही बच्चों का शारीरिक विकास न होना, बच्चों में विभिन्न पोषक तत्वों की कमी का कारण खोजना, बच्चों में विभिन्न बीमारियों का पता लगाना और बच्चेां की उम्र के हिसाब से उनका शारीरिक व मानसिक विकास नहीं होना है। इन चार कारणों की जांच कर हेल्थ टीम बच्चों को संपूर्ण विकास कराने में मदद करेगी।
परेशानी से बचाने के शुरू की सेवा
॥आम लोगों का समय बर्बाद न हो और मरीज को किसाी प्रकार की परेशानी से बचाने के लिए कंप्यूटरीकृत सेवा शुरू कर दी गई है। इस सेवा के तहत अब रोगी का चिकित्सा रिकार्ड भी सुरक्षित रखा जा सकेगा। उसे कितनी दवाएं मिली हैं ये भी ऑनलाइन हो जाएगा।
डा. रमेश धनखड़, सीएमओ झज्जर।