भाकली के नाम पर हों परियोजनाएं
भास्कर न्यूज - कोसली
कोसली-भाकली नामकरण विवाद का जिन एक बार फिर से बाहर आ गया है। भाकली स्थित मंदिर परिसर में नाहड़ के पूर्व सरपंच कुलदीप यादव के नेतृत्व में महांपचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में मौजूद युवाओं ने साफ कर दिया कि भाकली की जमीन पर बनी परियोजनाओं का नाम उनके गांव के नाम पर ही होना चाहिए अन्यथा वे सरकार की खुली बगावत करेंगे।
कमेटी गठित, करेगी सरकार से बातचीत
महापंचायत में मौजूद लोगों ने कहा कि जिस भी गांव की जमीन पर निर्माण होता है या विकास कार्य होते हैं उनका नामकरण उसी गांव के नाम पर होता है, लेकिन भाकली गांव के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। भाकली गांव के लोगों को नीचा दिखाने के लिए बार-बार परियोजनाओं का नामकरण बदला जाता है। वक्ताओं ने कहा कि किसान भवन, सब्जी मंडी, साल्हावास रोड़ पर बने रेलवे ओवरब्रिज, अनाज मंडी, मार्केट कमेटी, रेलवे स्टेशन का निर्माण उनके गांव की पंचायती जमीन पर ही हुआ है लेकिन इसके बावजूद भी कोसली का नाम लिखने का प्रयास किया जा रहा है। महापंचायत में निर्णय लिया गया कि भाकली गांव की मांगों को रखने के लिए 21 सदस्यीय कमेटी गठित की है जो सरकार से बातचीत करेगी।
इन परियोजनाओं पर चाहते हैं गांव का नाम
भाकली वासी किसान भवन, सब्जी मंडी, साल्हावास रोड़ पर बने रेलवे ओवरब्रिज, अनाज मंडी, मार्केट कमेटी, रेलवे स्टेशन पर भाकली का नाम चाहते है।
21
सदस्यीय कमेटी में ये शामिल
महापंचायत में 21 सदस्यों की कमेटी का गठन किया गया जिसमें चेयरमैन श्याम यादव, विनोद लिलोढ़, गोरीया सरंपच राजेश, कृष्ण नम्बरदार सुधराना, कारौली पूर्व सरपंच झुथर सिंह, सतीश लुखी, धर्मेन्द्र भुरावास, बलवान भाकली,प्रेमप्रकाश नाहड़, सरदार बहाला, रणबीर कुहारड़, बीर सिंह सरपंच लुखी, तकदीर सरपंच साल्हावास, कर्णसिंह भंडगी, जयसिंह धनिया, कृष्ण बव्वा, सोमबीर लडाय़न,औमप्रकाश लुला अहिर, मुकेश ड़ागर भाकली, सतीश पंच भाकली व सोनू पटेल को शामिल किया गया है।
विवाद के कारण सांसद ने 9 जनवरी को किया था दौरा रद्द
भाकली कोसली सीमा पर बने किसान भवन का उद्वघाटन रोहतक सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा द्वारा 9 जनवरी को किया जाना था, लेकिन दोनों गांवों की तरफ से लगातार चली पंचायत में विवाद ने उग्र रूप ले लिया था। विवाद बढ़ता देख सांसद ने परियोजनाओं के उद्घाटन कार्यक्रम को रद्द कर दिया था। बाद में उपायुक्त ने भाकली किसान भवन का उद्वघाटन किया तो भाकली के ग्रामीणों में रोष हो गया और उन्होंने कोसली के नाम किसान भवन पर लगे शिलान्यास पट्टों को तोड़ डाला था।