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रुक्मणी के संकल्प पर विवश हो गए श्रीकृष्ण
भास्कर न्यूज - सोनीपत
सेक्टर-14 स्थित अग्रसेन भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा वाचक आचार्य राजेश मिश्र ने कृष्ण रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाया।
संगीतमयी प्रवचन के माध्यम से उन्होंने रुक्मणी के नि:स्वार्थ प्रेम का वर्णन करते हुए कहा कि रुक्मणी ने अपने अंत:मन से भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति स्वीकार कर चुकी थी। जिसके लिए उनके परिजन बिल्कुल तैयार नहीं थे, लेकिन उनकी दृढ़ संकल्प के सामने सभी को घुटने टेकने पड़े। रुक्मण नरेश को विवश होकर श्रीकृष्ण व रुक्मणी का विवाह स्वीकार करना पड़ा। मंगला परिवार द्वारा अग्रसेन भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा आचार्य राजेश मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण की बाललीलाओं का वर्णन करते हुए विवाह की कथा सुनाई।
इसके बाद स्वामी दयानंद सरस्वती यति महाराज ने अपने प्रवचनों से सभी श्रोताओं को मानव जीवन के व्यवहार के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। जिसमें उन्होंने कहा कि इंसान का सबसे बड़ा गुण दयालुता है। अगर उसके अंदर दयालुता नहीं तो इंसान कहलाने लायक नहीं है। इस दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।