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समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुई थी लक्ष्मी

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - राई
मुरथल गांव के प्राचीन बाबा बिशनदास धाम में श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कथावाचक स्वामी सत्यदेव जी महाराज ने कहा कि दिवाली मनाने का संबंध भगवान राम के बनवास काटकर अयोध्या लौटने से नहीं है, बल्कि दिवाली का पर्व समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुई मां लक्ष्मी के जन्म से है। इसी वजह से दिवाली के दिन मां लक्ष्मी का पूजन होता है।
गंगा भजन आश्रम हरिद्वार के संचालक स्वामी सत्यदेव ने कहा कि विडंबना है कि हिंदू होते हुए हमें अपने धर्म का ज्ञान नहीं है। दीवाली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्यौहार है, लेकिन इसे क्यों मनाया जाता है, इस बारे में कुछ लोगों को जानकारी है। शास्त्र बताते हैं कि जब समुद्र का मंथन किया जा रहा था तो मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था। इसी वजह से विजय के बाद देवताओं ने मां लक्ष्मी का पूजन किया था। मंथन के दौरान 14 रत्न, ऐरावत हाथी व भगवान का कच्छप जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति करने की कोई आयु सीमा नहीं होती। ध्रुव भक्ति को पांच वर्ष की आयु में भगवान के दर्शन हो गए थे। हरि प्रकट व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम से प्रकट हुई मैं जाना अर्थात भगवान हर जगह विद्यमान हैं, उन्हें तो केवल प्रेम से पाया जा सकता है। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि जब प्रह्लाद भक्त को होलिका अग्नि में लेकर बैठती है तो प्रह्लाद भक्त को खंभ में भगवान नरसिंह के रूप में दर्शन देते हैं। इस मौके पर रामबिलास गोयल, कृष्ण गोयल, नीरज गोयल, सतीश गोयल, सुभाष, रमेश, राजेश, कृष्ण गोयल, प्रवीन गोयल, अंकित गोयल, सुरेश गोयल, अनिल, साहिल गोयल आदि मौजूद थे।



राई. बाबा बिशनदास धाम में श्रीमद् भागवत कथा करते स्वामी सत्यदेव जी महाराज।