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नर्सरी के लिए बजट नहीं आया खिलाडिय़ों ने छोड़ा मैदान

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - सोनीपत
अभी जबकि सोनीपत से प्रतिभावान खिलाडिय़ों की एक खेप निकलनी शुरू ही हुई थी कि खेल विभाग की प्रोत्साहन योजना बीच अधर में ही लटक गई और तीन सालों बाद शुरू की गई हॉकी नर्सरी में खिलाड़ी चुनकर भी उसका हिस्सा नहीं बन पा रही है।
विभाग की ओर से खिलाडिय़ों को जो डाइट मनी दिए जाने की घोषणा की गई थी, वह खिलाड़ी तक नहीं पहुंची है। जिस कारण खिलाडिय़ों ने मैदान में आना ही छोड़ दिया है। इससे गांवों से लड़कियों को हॉकी खेलने के लिए प्रोत्साहित करने वाले प्रशिक्षक बेहद निराश हैं।
विभागीय जानकारी के अनुसार जिले में महिला हॉकी नर्सरी के लिए सीएम भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने मई 2013 में हॉकी नर्सरी शुरू करने की घोषणा की थी। जिसके बाद हॉकी नर्सरी के लिए पांच महीने बाद जाकर ट्रायल प्रक्रिया संचालित की गई। जिसमें जिलेभर की खिलाडिय़ों ने हिस्सा लिया। दो दिन तक चली ट्रायल प्रक्रिया के बाद क्षेत्र की 25 सर्वश्रेष्ठ खिलाडिय़ों का चुनाव किया गया।
डे-बोर्डिंग है यह नर्सरी : महिला हॉकी नर्सरी आवासीय न होकर डे-बोर्डिंग है। इससे महिला हॉकी खिलाड़ी सुबह-शाम खेलकर अपने घर जा सकेंगे। डे-बोर्डिंग नर्सरी में चयनित होने वाले खिलाडिय़ों को खेल विभाग द्वारा नि:शुल्क प्रशिक्षण व तीन हजार रुपए की डाइट मनी दिए जाने का प्रावधान किया गया था।
2010 से बंद थी हॉकी नर्सरी : वर्ष 2005 में पहली बार महिला हॉकी नर्सरी शुरू की गई और यह 2010 तक चली, लेकिन सब कुछ ठीक चलने के बाद इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद सीएम से निरंतर गुहार के बाद बीते वर्ष इसे मंजूरी मिली और ट्रायल प्रक्रिया संचालित कर दोबारा से शुरू किया गया।



॥ यह सही है कि सभी सरकारी औपचारिकता पूर्ण होने के बाद भी सोनीपत में महिला हॉकी नर्सरी शुरू नहीं हो सकी है, क्योंकि इसके लिए बजट ही नहीं पहुंचा है। शुरुआत में तो खिलाड़ी मैदान में अभ्यास के लिए आती थी, लेकिन अब उन्होंने भी आना छोड़ दिया है।’’

सुनीता दलाल, महिला हॉकी इंचार्ज, सोनीपत।

इससे लंबी लड़ाई के बाद हॉकी नर्सरी दोबारा से शुरू करवाने वाली कोच प्रीतम सिवाच भी बेहद निराश है। उनके मुताबिक ऐसे खिलाडिय़ों का उत्साह नहीं बढ़ सकता। मौजूदा दौर में अभिभावकों को खेलों के लिए प्रोत्साहित कर बच्चों को मैदान तक लाना आसान नहीं है। अगर प्रोत्साहन नहीं मिलेगा तो बच्चें मैदान से दूर होना कोई बड़ी बात नहीं है।

ऐसे नहीं हो सकता भला



सोनीपत. हॉकी नर्सरी की ट्रायल प्रक्रिया में भाग लेती हुई खिलाड़ी। ((फाइल फोटो))