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रजिस्ट्री करवाने के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर

7 वर्ष पहले
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अनिल भारद्वाज - सोनीपत
रजिस्ट्री करवाने के लिए अब बार-बार तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। आमजन को एक दिन पहले रजिस्ट्री करवाने के लिए नायब तहसीलदार के पास रजिस्ट्रेशन करवाना होगा और उसे तुरंत फिर अगले दिन के लिए रजिस्ट्री का उपयुक्त टाइम दिया जाएगा।
इस दौरान रजिस्ट्री वाले दस्तावेज भी चैक किए जाएंगे। यदि उनमें कुछ दस्तावेजों की कमी होगी तो उसको भी समय रहते पूरा करा लिया जाएगा। यदि निर्धारित समय पर लोग नहीं पहुंच पाए तो उनका नंबर काट दिया जाएगा और अगले दिन का टाइम लेना पड़ेगा। आमजन के समय की बचत को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इस व्यवस्था के फरवरी माह के अंतिम सप्ताह तक अमल में आने की संभावना है। सोनीपत तहसील के साथ कस्बों में भी इस सिस्टम के अनुसार रजिस्ट्रियां होंगी।
सोनीपत तहसील में रोजाना औसतन 12 रजिस्ट्रियां होती हैं। लोगों को एक-एक रजिस्ट्री करवाने में सारा दिन बीत जाता है। टाइम कीमती है और इस स्थिति में टाइम बर्बाद भी नहीं जाना चाहिए। इसके लिए नायब तहसीलदार के कार्यालय में रजिस्ट्री से एक दिन पहले खरीदार या विक्रेता को फ्री में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। इस दौरान उक्त व्यक्ति की पासपोर्ट साइज फोटो भी लगेगी। रजिस्ट्रेशन करवाने जो पहले आएगा, उसको पहला टाइम मिलेगा या फिर उक्त सीट पर अफसर किस समय आएगा, उसके मुताबिक पहले से ही कार्य निर्धारित हो जाएगा।
क्योंकि ऑफिस कार्य भी बहुत होते हैं, इसलिए अधिकारी या कर्मचारी भी अन्य जगह कार्य करने के लिए चले जाते हैं। रजिस्ट्री करने का समय सुबह 10 से चार बजे तक का निर्धारित किया है। चार से पांच बजे तक उस दिन हुई रजिस्ट्रियां ऑनलाइन कर दी जाएंगी। आमजन पांच बजे के बाद अपनी-अपनी रजिस्ट्री विभाग की वेबसाइट पर देख सकते हैं।



बदलाव होगा : नायब तहसीलदार के कार्यालय में रजिस्ट्री से एक दिन पहले खरीदार या विक्रेता को फ्री में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। रजिस्ट्रेशन के दौरान यह देखा जाएगा कि उक्त सीट पर अफसर किस समय उपलब्ध होगा, उसके मुताबिक ही रजिस्ट्री का समय निर्धारित किया जाएगा और बार-बार चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।

मौजूदा व्यवस्था : आमजन को रजिस्ट्री कराने के लिए तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। एक दिन में जिला तहसील में करीब १२ रजिस्ट्रियां होती हैं। रजिस्ट्री के लिए जब कोई पहुंचता है तो कभी अधिकारी छुट्टी पर होता है तो कभी फाइल में कमी निकाल दी जाती है, जिससे परेशानी से रू-ब-रू होना पड़ता है।

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तहसीलदार राममेहर बताते हैं कि यह सिस्टम आमजन के लिए बेहतर है। लोगों को चाहिए कि वह दलाल के चंगुल में न फंसें। रजिस्ट्रेशन के दौरान खरीदार या बेचने वाले में एक का होना जरूरी है। दलाल लोगों को डरा देते हैं। दलाल पैसे ले जाते हैं और अफसरों का नाम बदनाम होता है। यदि कोई अफसर या दलाल पैसे मांगे तो उपायुक्त को भी शिकायत की जा सकती है।

रजिस्ट्री करवानी नहीं आसान : सुरेश शर्मा, विनोद खत्री बताते हैं कि रजिस्ट्री करवाना आसान बात नहीं है। कभी तहसीलदार छुट्टी पर मिलते हैं तो कभी ऑपरेटर। कर्मचारी भी फाइल में एक-एक कमी निकालकर कई दिन तक उलझाकर रखते हैं। यदि रजिस्ट्रेशन के दौरान फाइल चैक होगी तो बड़ी राहत मिलेगी।

दलाल को न दें फाइल



रजिस्ट्री के लिए बेचने वाले के पास मलकीयत का प्रूफ और बेचने वाले की ही आईडी ली जाती है। इसके बाद बेचने वाले, खरीदार व दो गवाह तैयार करके ले जाने पड़ते हैं।

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