सुदामा जैसी भक्ति से मिलेंगे कन्हैया
भास्कर न्यूज - राई
मुरथल गांव के प्राचीन बाबा बिशनदास धाम में श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन गुरुवार को राजा परीक्षित और सुखदेव मुनी के वियोग के साथ कथा का समापन हो गया। भागवत आचार्य स्वामी सत्यदेव जी महाराज ने कथा के अंतिम दिन अपने प्रवचन के माध्यम से संदेश दिया कि जब तक गोपियों जैसा प्रेम और सुदामा जैसी सच्ची मित्रता व भक्ति नहीं होगी, तब तक कृष्ण कन्हैया को नहीं पाया जा सकता। भगवान को पाने के लिए विश्वास और समर्पण की भावना होनी चाहिए।
स्वामी सत्यदेव ने कहा कि सात दिनों तक श्रद्धालुओं ने भगवान के अनेक जन्म, रूप व उनकी कलाओं के बारे जाना है। यदि भगवान के प्रति पूरे नियम के साथ श्रद्धा रखी जाए तो उनका श्रीमद् भागवत कहना और आपका भागवत कथा सुनना दोनों सार्थक हो जाएगा। मीरा बाई, सुदामा, प्रह्लाद भगत, धन्ना जाट, राजा हरिशचंद्र ने अपनी सच्ची लगन से की गई भक्ति से भगवान को पा लिया था।
श्रीकृष्ण भगवान ने अपने मित्र गरीब सुदामा को बिन मांगे सब कुछ दे दिया था। भगवान हमेशा भक्त के वश में होता है। इस मौके पर बाबा बिशन धाम के संरक्षक अजय गोयल व सुषमा गोयल ने हरिद्वार के करूणा निकुंज धाम को ढाई लाख रुपए का दान दिया। कथा के दौरान रामविलास गोयल, कृष्ण गोयल, राजेश गोयल, प्रवीन गोयल आदि मौजूद थे।