जागरूक हुए हम, अब १ हजार पर ८८० बेटियां
भास्कर न्यज - जींद
कन्या भू्रणहत्या के खिलाफ चले अभियानों का असर कहें या कुछ और। आखिरकार बेटियों के लिए जिले के लोग जागरूक हुए। पिछले साल की तुलना में यहां एक हजार के अनुपात को तोड़ 880 बेटियों ने जन्म लिया है।
यह स्कूल-कॉलेज स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम, खाप पंचायतों के प्रयास और सामाजिक संगठनों द्वारा उठाए गए कदम की ही देन कहा जाएगा। अब जिले में 1000 लड़कों के अनुपात में 8८० लड़कियां हैं। पिछले साल यह आंकड़ा 870 रहा है। जिले में पिछले एक साल में कन्या भ्रूणहत्या का कोई मामला सामने नहीं आया। इसमें सोशल मीडिया का भी बड़ा योगदान रहा है।
लोगों ने दिखाई जागरूकता, समाज में दिया सकारात्मक संदेश
पिछले एक साल में भ्रूणहत्या रोकने के लिए 25 से अधिक बार निरीक्षण किए हैं, लेकिन कोई खामी नहीं पाई गई।
- नरेंद्र अत्री, जिला परिवार कल्याण शिक्षा अधिकारी, जींद
कन्या भ्रूणहत्या के खिलाफ पंचायतों के अलावा युवा संगठन, महिला संगठन, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी वर्कर अहम भूमिका निभा सकती हैं।
- सुनील जागलान, सरपंच, बीबीपुर
जिले के युवाओं ने अब इस तरफ कदम बढ़ाए हैं। लगातार युवा पीढ़ी बेटी बचाओ अभियान से जुड़ रही है।
- अमित निडानी, संयोजक, बेटी बचाओ, सृष्टि बचाओ अभियान
लिंग जांच पर रोक लगाने के लिए पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट 1994 लागू है। इसके तहत लिंग जांच करने या करवाने संबंधी आरोप तय होने पर आरोपी को ३ साल सजा व १० हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है। अगर आरोपी दोबारा पकड़ा जाता है तो पांच साल सजा और 50 हजार जुर्माना हो सकता है। अल्ट्रासाउंड मशीन को जिला स्वास्थ्य विभाग में सिविल सर्जन से रजिस्टर्ड करवाना होता है।
भूणहत्या के नियम और सजा
एक जनवरी को बेटी बचाओ सृष्टि बचाओ अभियान द्वारा सामान्य अस्पताल में बेटी की सुरक्षा का आह्वान करते हुए हवन किया गया। अभियान संयोजक अमित निडानी ने बताया कि उनके संगठन ने कन्या भ्रूण हत्या की जानकारी देने वालों को सवा लाख रुपए इनाम की राशि देने की भी घोषणा की हुई है। महात्मा गांधी संस्थान ने मिशन रक्षक अभियान चलाया है।
नए साल से चलाए ये अभियान