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...आखिर कहां रखें ब्लड

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - कुरुक्षेत्र
मात्र एक ही उद्देश्य कि टूट जाए अपना ही रिकॉर्ड। ऐसा हुआ भी। रक्तदान के लिए हजारों की तादाद में संगत एकत्रित हुई। जैसे सरकारी राशन लेने के लिए दुकानों पर भीड़ दिखती है। उसी तरह पहली बार रक्तदान के लिए लोगों को जद्दोजहद करते देखा। लेकिन डर है तो सिर्फ इस बात का कि हजारों यूनिट रक्त कहीं बेकार न हो जाए।
गौरतलब है कि डेरा सच्चा सौदा द्वारा देशभर में जिला स्तर पर रक्तदान शिविर लगाए गए। इसके चलते कुरुक्षेत्र में ढांड रोड स्थित नामचर्चा घर में आयोजित रक्तदान शिविर में करीब पांच हजार यूनिट रक्तदान एकत्रित करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें करीब डेढ़ हजार यूनिट रक्तदान भी हुआ। जबकि जिले में करीब 500 यूनिट रक्त संग्रहित करने की क्षमता है। रक्त सिर्फ 35 दिन ही सुरक्षित रह सकता है। इसके बाद वह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
थोड़े अंतराल के बाद होना चाहिए रक्तदान : कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि जिले में एक साथ हजारों यूनिट रक्तदान कराने की बजाय कुछ समय के अंतराल पर शिविर लगाना सही है। इससे खून की शुद्धता बनी रहती है। वहीं जरूरत के हिसाब से लोगों को उपलब्ध भी कराया जा सकता है। एक साथ हजारों यूनिट रक्त एकत्रित करने से उसके जल्द ही खराब होने की संभावना बनी रहती है। जबकि खपत उस मुताबिक नहीं हो पाती।
35 दिन तक सुरक्षित रहता है खून : सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक के इंचार्ज डॉ. मनजीत सिंह का कहना है कि शिविर में एकत्रित रक्त को 35 दिन की अवधि के दौरान इस्तेमाल करना पड़ता है। यदि इसका समय पर प्रयोग न हो तो वह बेकार हो जाता है। कहा कि कुरुक्षेत्र जिले में महीने में खून की खपत करीब 300 यूनिट है।
डॉक्टर्स के अभाव में मायूस लौटे हजारों रक्तदाता : कुरुक्षेत्र - उनमें होड़ थी रिकॉर्ड बनाने की। रिकॉर्ड बेशक खुद के लिए था, लेकिन उद्देश्य दूसरों की जान बचाने का था। लोगों में रक्तदान करने को लेकर होड़ मची थी। यह नजारा था झांसा रोड स्थित नामचर्चा घर में डेरा सच्चा सौदा सिरसा की ओर से आयोजित रक्तदान शिविर का। देश के 25 राज्यों में एक साथ रक्तदान करने का रिकॉर्ड डेरा की तरफ से बनाने के लिए यह आयोजन किया गया। सुबह नौ बजे सभी राज्यों में एक साथ रक्तदान शिविर शुरू हुए। वहीं रक्तदान शिविर में रक्तदाता तो बहुत पहुंचे, लेकिन खून लेने वालों की कमी दिखी। जिले में पांच हजार रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड बनाना था। जोकि पूरा भी हो गया। वहीं एक ही दिन में 1257 ने रक्तदान कर जिले में भी रिकार्ड बनाया। हालांकि इससे ज्यादा रक्त एकत्रित होता, लेकिन डॉक्टरों की टीमें ही ज्यादा रक्त एकत्रित नहीं कर पाई। ऐसे में कई श्रद्धालुओं को बिना रक्तदान किए वापस लौटना पड़ा।
गौरतलब है कि डेरा सच्चा सौदा द्वारा नशा मुक्ति समाज की सृजना के लिए मस्तो मस्त रूहानी रूबरू नाइट के 100वें पड़ाव के उपलक्ष्य में रक्तदान शिविर लगाया गया था। शिविर में जिला स्वास्थ्य विभाग और लखनऊ नर्सिंग होम एसोसिएशन की ओर से डॉक्टर्स ने अपनी सेवाएं दीं। इसमें सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. मनजीत सिंह, मनीष सिंगला, रणधीर व मंदीप ने रक्त एकत्रित किया। डेरे से जुड़े विकास गर्ग व विशाल टिंडल ने कहा कि मानवता भलाई कार्यों के अलावा विभिन्न क्षेत्रों में डेरा सच्चा सौदा के नाम अब तक 15 गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड हैं, जिनमें एक ही दिन में, एक ही जगह ((सिंगल लोकेशन)) पर 43,732 यूनिट रक्तदान का विश्व कीर्तिमान भी डेरा के नाम गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज है। शिविर में रामेश्वर टिंडल, ईश्वर, दीपक, सतीश, नरेश, प्रवीन, रमन, नरेंद्र, विरेंद्र, पूनम, पुनीत, जनक राज, धर्मपाल और बलवान मौजूद थे।

कुरुक्षेत्र - ढांड रोड स्थित नामचर्चा घर में डेरा सच्चा सौदा की ओर से लगाए गए रक्तदान शिविर में हिस्सा लेते श्रद्धालु।

रक्तदान के लिए पहुंचे पांच हजार श्रद्धालु

डॉ. राजकुमार चौहान का कहना है कि उनका कार्य रक्तदाताओं को जोडऩा था, बाकी काम डॉक्टरों की टीम को करना था। इसके लिए कई टीम बुलाई गई थी, लेकिन दो ही टीमें शिविर में पहुंची। कहा कि शिविर में पांच हजार लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ। लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण ज्यादा रक्त संग्रहित नहीं हो पाया। यदि ज्यादा रक्तदान होता तो फिर उसी हिसाब से उसके संग्रहण की भी व्यवस्था की जाती।



1257 यूनिट हुआ रक्तदान

डॉ. आके चौहान का कहना है कि शिविर में लखनऊ की इस टीम ने 1025 यूनिट रक्त एकत्रित किया, जबकि सरकारी अस्पताल की टीम ने कुल 232 यूनिट रक्त एकत्रित किया। नाम चर्चा घर में सभी ब्लाकों से लगभग 5000 रक्तदाताओं ने रक्त देने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया। हालांकि काफी संख्या में रक्तदाता बिना रक्तदान किए ही निराश होकर लौट गए।

कुरुक्षेत्र - ढांड रोड स्थित नामचर्चा घर में डेरा सच्चा सौदा की ओर से लगाए गए रक्तदान शिविर में कम पड़ी रक्त लेने वाले डॉक्टरों की टीम, जिसके चलते खाली पड़े रहे बेड।