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भाई उदय सिंह के किले पर फहरा पहली बार तिरंगा
कैथल - आजादी के बाद से उपेक्षा झेल रहे भाई उदय सिंह के किले पर पहली बार गणतंत्र दिवस तिरंगा फहरा। खंडहर हुए इस किले की तरफ कभी किसी शासक-प्रशासक ने ध्यान ही नहीं दिया। रणदीप सुरजेवाला की पहल पर एक माह पहले किले की मरम्मत शुरू हुई थी। इसमें म्यूजियम बनाया जाना प्रस्तावित है। रविवार को गणतंत्र दिवस पर डीसी एनके सोलंकी जिला स्तरीय कार्यक्रम शुरू होने से पहले किले पर पहुंचे और तिरंगा फहराया। किले के बाहरी हिस्से की मरम्मत होने के बाद वह दूर से ही नजर आने लगा है। जैसे ही किले पर तिरंगा फहरा लोग उसे देखने के लिए रुक गए। ऊपर तिरंगा और लाल रंग में रंगा किला दिल्ली के लाल किले की तरह लग रहा था। किले को नया लुक देने में लगे नाथी राम का कहना है कि किले पर हर साल इसी तरह तिरंगा फहराया जाना चाहिए। भाई उदय सिंह के मंत्री के किले में बरसों एसडीएम कोर्ट व निवास रहा है।
कैथल 1767 में था भाइयों की रियासत
भगतुवंसी भाई गुरबख्श सिंह के पुत्र भाई देसू सिंह ने 1767 में इस क्षेत्र पर जीत हासिल करके कैथल को अपनी राजधानी बनाया था। उनके सुपुत्र लाल सिंह ने इस विरासत को संभाले रखा। उनके सुपुत्र लाल सिंह के पोते उदय सिंह ने करनाल और जींद तक इसका विस्तार कर लिया। यह किला विदक्यार तीर्थ के किनारे स्थित है। भाई उदय सिंह के पास कोई संतान नहीं थी। उनकी 15 मार्च 1843 को मौत हो गई। इसके पश्चात अंग्रेजों ने उनकी रियासत को अपनी रियासत में शामिल कर लिया। आजादी के बाद से किले के एक हिस्से में थाना शहर चल रहा है। दूसरे हिस्से में 30 साल के अधिक समय तक ट्रेजरीं का दफ्तर रहा था।