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सबसे सस्ता ऊर्जा का साधन है बायोगैस संयंत्र: नैन
भास्कर न्यूज - गुहला चीका
कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा गांव खरौदी में बायोगैस संयंत्र के बारे में महिलाओं का एक प्रशिक्षण शिविर लगाया गया, जिसकी अध्यक्षता सहायक कृषि अभियंता कैथल इंजीनियर जगमंदर सिंह नैन ने की। उन्होंने बताया कि बायोगैस रसोई के लिए सबसे सस्ता ऊर्जा का साधन है, जिसमें गोबर के पाचन प्रक्रिया द्वारा गैस बनती है।
खाना बनाने के साथ-साथ उत्तम खाद भी मिलती है और इसके फटने का डर भी नहीं होता है। पर्यावरण शुद्ध रहता है और इसके प्रयोग से आंखों, फेफड़ों की बीमारियां पैदा करने वाले धुएं से मुक्ति मिलती है। खाना बनाने में बर्तन भी काले नहीं होते। बायो गैस ऐसे स्थान पर बनाना चाहिए, जहां अधिक से अधिक समय तक धूप रहती हो तथा रसोई घर व पशुशाला के आसपास हो। इंजीनियर सज्जन सिंह ने कहा कि बायोगैस प्रयोग से बहुमूल्य लकड़ी की बचत होती है तथा इससे पैदा होने वाली गैस से लाइट तथा जनरेटर भी चलाया जा सकता है। शिविर में महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों ने भी भाग लिया। कृषि विकास अधिकारी डॉ. विजयपाल ने भी गैस के रखरखाव बारे महिलाओं को बताया कि सर्दियों में गोबर का घोल दिन में बनाएं जिसमें गैस उत्पादन के लिए उचित तापक्रम मिल सके। संयंत्र में निकलने वाली स्लरी को मेन्योर पिट में पृथल एकत्रित करें, चूल्हे व लैप पर गैस खोलने के पूर्व माचिस जलाएं, जब गैस का उपयोग नहीं करना हो तब सभी वाल्व बंद कर दें। गैस का दक्षतापूर्ण उपयोग करने के लिए गैस जलाने से पूर्व खाना बनाने का सारा सामान एकत्रित कर लें तथा निकास द्वार पर स्लरी नहीं जमने दें व डोम वाले संयंत्रों में आउटलेट में स्लरी के तल की जांच करें। इस अवसर पर तकनीकी सहायक डॉ. बाबू राम, बीटीएम सचिन पंवार, धर्मचंद मिस्त्री तथा गांव की महिलाओं सहित अन्य लोग भी मौजूद रहे।
खरौदी में महिलाओं को दी जानकारी