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अब लाइसेंस-आरसी के लिए नहीं आना पड़ेगा शहर में

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - कैथल
कोई सर्टिफिकेट बनवाना है, जमाबंदी लेनी है या वाहन की आरसी बनवाना है। इसके लिए लोगों को अब शहर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रदेश सरकार की तमाम तरह की सुविधाएं अब गांवों में ही मिलेंगी। क्लस्टर स्तर पर 16 कॉमन सर्विस सेंटर खोले जाएंगे। हर समस्या की शिकायत भी ऑनलाइन करने की सुविधा होगी।
लोगों की परेशानी का देखते हुए प्रदेश सरकार के सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने यह सेंटर खोलने का फैसला लिया है। हर व्यक्ति को छोटे से कार्य के लिए शहर आना पड़ता है। तमाम तरह के सर्टिफिकेट लघु सचिवालय के ई-दिशा केंद्र में बनते हैं। यहां पर कागजात जमा कराने के लिए घंटों लाइनों में खड़ा रहना पड़ता है। कागज तैयार होने के बाद उसे लेने के लिए भी बार-बार शहर आना पड़ता है। तमाम तरह की नौकरियों के आवेदन भी अब ऑनलाइन भरने शुरू हो गए हैं। आवेदन करने और फीस जमा करवाने के लिए यहां पर लंबी लाइन लग जाती है। इन सेंटरों में दी जाने वाली सेवाओं में ई-दिशा केंद्र की तर्ज पर जाति, इकनॉमिक बैकवर्ड क्लास, ओबीसी, रिहायशी प्रमाणपत्र सेवाएं, राजस्व विभाग की जमाबंदी, इंतकाल, बिजली, पानी कनेक्शन व बिल, नौकरियों के लिए ऑनलाइन आवेदन,वाहन की आरसी, लाइसेंस, आधार कार्ड किट, राजिस्ट्री के लिए अप्वाइंटमेंट,राशन कार्ड, बुढ़ापा पेंशन के अलावा सभी प्रकार की पेंशन के लिए आवेदन किया जा सकता है। हर समस्या पर पर शिकायत दर्ज करवाने की सेवाएं शामिल होंगी।



ये है सेंटर खोलने की प्रक्रिया

सेंटर को चलाने वाले व्यक्ति का इंफ्रास्ट्रक्चर अपना होगा। सरकार द्वारा जगह उपलब्ध कराई जाएगी। विभिन्न प्रकार के प्रमाण-पत्रों के लिए सरकार द्वारा लिए जाने वाली फीस का 70 प्रतिशत का भुगतान कॉमन सर्विस सेंटर संचालक को दिया जाएगा। जो व्यक्ति गांवों में सेंटर खोलना चाहता है। वह सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग में जिलास्तर पर ही तीन फरवरी तक अपना आवेदन कर सकता है। एक सेंटर के संचालन पर दो लाख रुपए इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे। जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी दीपक खुराना ने बताया कि इन केंद्रों के लिए प्रत्येक गांव से एक युवा को रोजगार भी मुहैया करवाया जाएगा, जो जिला प्रशासन से सेंटर चलाने की अनुमति लेगा। इसके बाद लोगों के आवेदन अनुसार कागज तैयार करते हुए उन्हें प्रमाण पत्र बनाकर दे सकेगा।