पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • चलती का नाम गाड़ी ! 36 साल ट्रेन चलाई, एक युवती की जान बचाने वाला लम्हा हमेशा याद रहेगा

चलती का नाम गाड़ी -!- 36 साल ट्रेन चलाई, एक युवती की जान बचाने वाला लम्हा हमेशा याद रहेगा

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
महेंद्र सिंह - सिरसा
रिटायर्ड होने के अंतिम दिन भी मन में ट्रेन चलाने की ही तमन्ना थी। हिसार से रेवाड़ी फाजिल्का ट्रेन का सिरसा के लिए जैसे ही समय हुआ। ट्रेन का चालक मनोज कुमार ट्रेन को चलाने के लिए तैयार हुआ। मगर बुधवार को रिटायर्ड हुए 60 वर्षीय ट्रेन के पायलट उदय राम ने कहा कि आज भी मैं ही ट्रेन चलाऊंगा यार। ये कहते हुए सिरसा की तरफ ट्रेन को दौड़ाना शुरू कर दिया।
36 वर्ष की रेलवे विभाग में अपनी सेवा देने के अंतिम दिन भी खुद सिरसा के चतरगढ़ निवासी उदय राम स्टेशन पर ट्रेन लेकर पहुंचे। आगे फाजिल्का की तरफ मनोज ट्रेन लेकर गया। ट्रेन रोकी तो दोस्त फूल मालाएं लेकर खड़े थे। अंतिम बार हॉर्न बजाया और ईंजन को सलाम कर भारी मन से उदयराम ट्रेन से उतरे। बोले-कल मैं ट्रेन नहीं चलाऊंगा, मन को समझा नहीं पा रहा।



हिसार से विदाई पार्टी लेकर सिरसा ट्रेन लेकर पहुंचे उदयराम का स्टेशन पर स्वागत करते उसके परिजन औमप्रकाश खटावला,जेपी पाडे व अन्य।

स्टेशन पर हुआ स्वागत

रेलवे स्टेशन पर जैसे ही हिसार से चलकर रेवाड़ी फाजिल्का ट्रेन पहुंची। ट्रेन के रुकते ही पटाखे व ढोल बजने लगे। ट्रेन के इंजन से चालक उदय राम का माला डालकर स्वागत किया गया तब जाकर यात्रियों की समझ में आया कि चालक सेवानिवृत्त हुए हैं। स्टेशन मास्टर जेपी पाठक ने कहा कि जो सेवाएं उदय राम ने रेलवे विभाग को दी है। उसको हमेशा याद रखा जाएगा।

अब परिजनों के साथ समय बिताउंगा

रेलवे विभाग में सेवाएं देने वाले चालक उदय राम ने कहा कि नौकरी के कारण परिजनों को कम समय दे पाता था। जिसकी परिजन भी शिकायत करते थे। अब पूरा समय परिजनों के साथ रहूंगा।

मोबाइल पर बात करते पटरी पर चल रही थी वो...ब्रेक लगाने पड़े

उदयराम ने बताया कि हर दिन ट्रेन में बैठते ही भगवान से करते थे अच्छी यात्रा की कामना।

सिरसा - बुधवार को सेवानिवृत्त हुए उदयराम बोले-36 साल पहले लोको पॉयलट भर्ती हुआ था। दो साल ट्रेन के पायलट का सह चालक रह और फिर नियमित हो गया। भगवान का शुक्र है कि कभी ट्रेन पटरी से नहीं उतरी। रोज सुबह ट्रेन का इंजन स्टार्ट करते ही भगवान से प्रार्थना करता था कि मेरे साथ हर यात्री का सफर मंगल ही करना भगवान। भगवान ने हर प्रार्थना सुनीं। पर दो महीने पहले ही एक घटना ताउम्र याद रहेगी। हुआ यूं था कि मैं जैसे ही ट्रेन सिरसा स्टेशन से बंठिडा की तरफ चलाने लगा, उसी दौरान एक युवती मोबाइल पर बात करती दिखाई दी। वह रेलवे लाइन पर थी और बातचीत में खोई हुई थी। मैं समझ गया कि कुछ करना होगा। मैंने तुरंत एमरजेंसी ब्रेक लगाए। ट्रेन झटके के साथ रूकने लगी। युवती से मुश्किल से दो हाथ के फासले पर ट्रेन रूक गई। मेरी सांसें रूकने को थी। युवती का ध्यान अचानक पीछे गया तो वह सन्न रह गई। मोबाइल उसके हाथ से गिर गया और पसीना पसीना हो गई। मैं भगवान का शुक्रिया अदा किया और युवती को लाइन से हटने का इशारा किया। युवती सदमे में थी, बड़ी मुश्किल से उसने अपना कदम आगे बढ़ाया। मैं अपने सफर पर चल पड़ा लेकिन जब तक जिंदगी रहेगी यह लम्हा हमेशा याद रहेगा। एक जिंदगी बचाने का सौभाग्य कोई भूल सकता है क्या।

रिटायरमेंट के दिन भी ट्रेन चला सिरसा पहुंचा उदयराम