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विभाग की लापरवाही से कर्ज में डूबा किसानइस्तेमाल की जा रही टाइलों के किनारे टूटे होने के अलावा पूरी तरह पकी भी नहींस्रद्घह्यद्यद्दद्मह्यस्रद्मद्यद्द...
भास्कर न्यूज - रतिया
जाखन दादी निवासी किसान चरणजीत सिंह पशु पालन विभाग व बैंक अधिकारियों के रवैये के कारण कर्ज में डूब गया है। उसे करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ है, जिससे उभर पाना अब उसके बस की बात नहीं।
किसान चरणजीत सिंह ने बताया कि उसने भैंसों की डेयरी खोलने के लिए पशु पालन विभाग से 10 भैंसों की खरीद के लिए पांच लाख रुपये लोन के लिए आवेदन किया था। जिसे विभाग ने मंजूर भी कर लिया था। नियमानुसार विभाग द्वारा डेयरी खोलने के लिए किसानों को सब्सिडी पर लोन पास किया जाता है। इसके लिए बैंक व पशु पालन विभाग के अधिकारियों की कमेटी बनी हुई है। यह कमेटी ही मंजूरी देती है। इसके बाद ही किसान पशु खरीदता है और बैंक द्वारा पशु बेचने वाले को चेक दिया जाता है। चेक के माध्यम से ही राशि का भुगतान होता है। इसके लिए किसान को पहली बार में 6 पशुओं की खरीद करवाई जाती है। 4 पशुओं की खरीद बाद में करवाई जाती है।
ये है मामला
किसान चरणजीत सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा गठित कमेटी ने जनवरी 2013 में उसे पशु खरीदने के लिए मंजूरी दे दी। उसे कहा गया कि किसान मुर्रा नस्ल की भैंस खरीद ले, विभाग पेमेंट कर देगा। इसके लिए विभाग ने 50 प्रतिशत सब्सिडी देनी थी और आधी राशि बैंक ने लोन के रूप में देनी थी। इसी आधार पर उसने 8 मार्च 2013 को बोड़ा के पशु पालक हरजीत सिंह से 50 हजार रुपये प्रति पशु के हिसाब से 6 पशुओं की खरीद करीब 3 लाख रुपये में कर ली। बाकायदा विभाग ने किसान से पैसे लेकर इन पशुओं का 48 हजार रुपये का बीमा भी करवा दिया। पेमेंट देने की बारी आई तो विभाग ने खजाना खाली होने की बात कहते हुए सब्सिडी देने से मना कर दिया। सब्सिडी न देने के कारण बैंक ने भी लोन राशि देने से मना कर दिया। मजबूरी में किसान को खरीदे गए पशुओं की कीमत ब्याज पर रुपये लेकर चुकानी पड़ी। इसी दौरान किसान की छह भैसों की अज्ञात बीमारी से मौत हो गई। किसान ने कहा कि विभाग सब्सिडी व लोन के लिए आनाकानी कर रहा है। उसके बाद जिन लोगों ने फार्म भरे हैं, उन्हें सब्सिडी दे दी गई है। जांच पड़ताल की तो पता चला कि सब्सिडी खत्म हो गई है।