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- ‘विकासशील देशों के साथ बनाने होंगे मैत्रीपूर्ण संबंध’
‘विकासशील देशों के साथ बनाने होंगे मैत्रीपूर्ण संबंध’
भास्कर न्यूज - शाहाबाद
एमएन कॉलेज में भारत विदेश नीति के समक्ष चुनौतियां एवं अवसर विषय पर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का उद्घाटन केयू के राजनीति शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजबीर सिंह यादव व कॉलेज की प्रबंधक समिति के प्रधान यशपाल वधवा ने दीप प्रज्जवलित कर किया।
प्रो. राजबीर यादव ने कहा कि यदि भारत ने विश्व मानचित्र पर अपनी छाप छोडऩी है तो उसे सैनिक तैयारी, साजो सामान व मजबूत आर्थिक स्थिति, सांस्कृतिक व प्रजातांत्रिक मूल्यों की स्थापना व शक्ति प्रदर्शन के क्षेत्र में अपना प्रभुत्व कायम करना होगा।
डॉ. विनय मल्होत्रा ने कहा कि शीत युद्ध के बाद चीन, अमेरिका, रूस, जापान, यूरोपियन यूनियन वैश्विक स्तर पर शक्ति का मुख्य केंद्र रहे, लेकिन उसके बाद इंडोनेशिया, टर्की, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका व भारत उभरती हुई शक्ति के रूप में सामने आए। इन देशों के विकास को भारत के पक्ष में महत्त्वपूर्ण बताया क्योंकि भारत इन देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाकर अपने पक्ष में उचित अवसर व माहौल पैदा कर सकता है। चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा से प्रो. विष्णु भगवान गुप्ता ने भारत की विदेश नीति के समक्ष आने वाले आॢथक व प्रशासनिक पहुलओं पर, जम्मू विश्वविद्यालय से प्रो. बलजीत सिंह मान ने लुकिंक ईस्ट लाइकिंग ईस्ट नीति के तहत भारत के दक्षिण पश्चिम एशिया के प्रति विदेश नीति में उत्तर पश्चिम क्षेत्र व म्यांमार जैसे क्षेत्रों के साथ संबंधों पर, पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से प्रो. पुष्पपिंद्र कौर ने भारत की विदेश नीति के समक्ष जलवायु परिर्वतन एक चुनौती विषय पर प्रकाश डाला।
हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेड़ी से डॉ. रणवीर सिंह ने चीन के उदय का भारत विदेश नीति पर पडऩे वाले प्रभावों का जिक्र किया। केयू के परीक्षा
नियंत्रक डॉ. हुक्म सिंह ने भी सेमिनार के विषय की सार्थकता पर प्रकाश डाला। जेएनयू दिल्ली से डॉ. महेश रंजन देवता ने भी
व्याख्यान प्रस्तुत किया। मंच का संचालन डॉ. शालिनी शर्मा ने किया। इस अवसर पर केसरदास गंभीर, ओपी गाबा और विजय कुमार मलिक उपस्थित रहे।