गुरिल्ला नीति को नहीं समझ पाए अधिकारी
सोमेश चौधरी - चरखी दादरी
बिजली कर्मचारियों की गुरिल्ला नीति को समझने में सरकार और आला अधिकारी में गलती कर गए। सरकार ने रोडवेज की हड़ताल को समाप्त कराकर सोचा कि अब अन्य विभागों के कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन बिजली कर्मचारियों प्लानिंग उनके समझ समझ आ पाई। इन कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने से पहले यह सब कुछ तय कर लिया था कि अगर फला उपकरण में फॉल्ट आ जाता है तो उसे कौन ठीक करेगा। उन सभी एक्सपर्ट को इन्होंने अपने साथ शामिल कर लिया। इन उपकरणों को एक्सपर्ट न मिलने के कारण बिजली समस्या बनी हुई है। बिजली बंद होने के कारण पेयजल, टेलीफोन सेवा के साथ साथ अन्य सेवाएं भी बाधित रही है। जबकि अधिकारी पूरी तैयारी का दावा ठोक रहे थे।
सरकार ने रोडवेज यूनियनों के साथ तो रात के अंधेरे में समझौता कर लिया और उनकी हड़ताल तुड़वा कर बसों को सड़कों पर चला दिया। अगले दिन शुरू हुई बिजली कर्मियों और अन्य विभागों के कर्मचारियों की हड़ताल को सरकार हलके में ले रही थी। बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश में रात ही नहीं बल्कि दिन में भी लोगों को परेशान कर रख दिया है। बिजली गुल होने से आम जन पूरी तरह परेशान है। पेयजल की सप्लाई नहीं हो रही। ऊपर से बारिश और ठंड ने भी लोगों को गुस्सा बढ़ा दिया है। प्रदेश के कई शहरों में तो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। हलके के आधा दर्जन से अधिक पावर हाउस और दर्जन भर से अधिक फीडरों ने काम करना बंद किया हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो दो दिन से बिजली का संकट बना हुआ है। बुधवार को तो शहर में भी सुबह से ब्लैक आउट रहा।
अफसरान हुए फेल
बत्ती गुल को देखकर लगता है कि कहीं न कहीं बिजली कर्मी इसमें सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। विभाग के आला अधिकारियों को कहना था कि विभाग ने कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद उनके पास पर्याप्त कर्मचारी होंगे। इसके लिए दैनिक वेतन भोगी और अधिकारियों को सहारा लिया जाएगा। लेकिन एक तो बारिश का मौसम और दूसरा जेई और एसडीओ के समझ से परे बिजली की लाइनों में आए फॉल्ट। कर्मी भी इन समस्याओं को दूर करने में कुछ खास नहीं कर पाए।
11 हजार केवी की लाइन का तार टूटकर गिरा
चरखी दादरी. पुराना बस स्टैंड स्थित बीडीपीओ ऑफिस के बगल वाली गली में सुबह 11 हजार केवी की बिजली लाइन टूट गई। इस लाइन को टूटने के कारण इस क्षेत्र के काफी इलाके की लाइट गायब हो गई। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते शाम 4 बजे तक इस लाइन को ठीक नहीं किया गया था। स्थानीय लोगों ने कहा कि लाइन के टूटने के बारे में विभाग को कई बार फोन किया, लेकिन कोई भी कर्मचारी लाइन को ठीक करने के लिए नहीं आया।
महिलाएं ध्यान न देती तो हो सकता था हादसा
दुकानदार मदनलाल का कहना है कि तार टूटने के समय मौके पर कुछ महिलाएं बैठी हुई थी। इसी दौरान तार टूट कर नीचे गिर गया। यह गनीमत रही कि महिलाओं का ध्यान तार की तरफ चल गया अन्यथा एक बड़ा हादसा हो सकता था। दुकानदार कर्ण सिंह का कहना है कि तार टूटने के समय चिंगारियां उठी। जिससे आग लगने की संभावना थी। मौसम में नमी व हल्की बूंदाबांदी से कोई घटना न हो सकी। दुकानदारों ने निगम से तारों की देखभाल करने की मांग की है ताकि कोई हादसा न होने पाए।