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लिंगानुपात के लिए संकुचित सोच दोषी : अर्चना
भास्कर न्यूज - चरखी दादरी
संस्कार पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को ‘राष्ट्रीय बालिका दिवस’ मनाया गया। मुख्याध्यापिका अर्चना शर्मा ने बताया कि आज समाज में जो लिंगानुपात बढ़ रहा है, वो हमारी संकुचित सोच का कारण है। हमारे
समाज की विडंबना है कि बालिकाओं को गर्भ में ही मार दिया जाता है, जबकि बालिकाएं एक नहीं दो-दो परिवारों का मार्गदर्शन करती हैं। तभी तो कहा गया है कि ‘लड़की एक नहीं दो-दो परिवारों की
तारनहार है।’ लेकिन आज का इंसान यह भूल चुका है। जिस बच्चे ने इस संसार में आंख भी नहीं खोली, उसकी नृशंस हत्या कर
दी जाती है।
बालक-बालिका में कोई भेदभाव न करें
स्कूल संचालक डॉ. सुभाष जैन ने बच्चों से कहा कि बालक और बालिका में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर हम यह प्रण लें कि इस समाज में जो विसंगतियां है उनको जड़ से उखाड़ देंगे, ताकि हमारा घर रूपी उपवन बालिकाओं की किलकारियों से महकता रहे।