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शॉल-चादर नहीं, हमें तो सम्मान चाहिए : सांगवान

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - चरखी दादरी
अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं उत्तराधिकारी संयुक्त संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुमेर सिंह ने कहा है कि स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को सम्मानित करने की बजाए सरकार अपमानित कर रही है। सुविधाओं के नाम पर केवल किताब छापी है। स्वतंत्रता के 66 वर्ष बाद भी स्वतंत्रता सेनानियों के पुत्रों को ये सिद्ध करना पड़ रहा है कि उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी हैं। अजीब विडंबना है कि जिन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी, देश में बेगानों जैसा हाल है। वे शुक्रवार को संगठन की बैठक संबोधित कर
रहे थे। जिला अध्यक्ष उमेद सिंह यादव ने कहा कि सरकार कागजों में स्वतंत्रता सेनानियों की चिकित्सा सुविधा दिखा रही है। स्वतंत्रता सेनानियों और उनकी विधवाओं को स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस पर सम्मान स्वरूप दिए जाने वाले शाल व चादर की जरूरत नहीं है। स्वतंत्रता सेनानी एवं विधवाओं ने कहा कि उन्हें सम्मान के रूप में शाल एवं लोई नहीं चाहिए, उनकी पहली पीढ़ी को पेंशन, मुफ्त चिकित्सा सुविधा, उनके पोते-पोतियों को नौकरी मिलनी चाहिए। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को राज्य परिवार घोषित करने की मांग की। बैठक में राजेंद्र सिंह, रणसिंह गिगनाऊ, समुंद्र भारीवास, सूबे सिंह, जय भगवान शामिल थे।