नहीं मिल रही पीला रतुआ की दवा
भास्कर न्यूज - यमुनानगर
कभी बारिश तो कभी तेज धूप। गेहूं की लहलहाती फसल में पीला रतुआ बीमारी लाने के लिए काफी है। तेज धूप से फसल में कभी भी पीला रतुआ आ सकता है। इसको लेकर कृषि विभाग के अधिकारी भी चिंतित है। लेकिन बीमारी पर कंट्रोल कैसे होगा। क्योंकि अधिकारियों ने एक माह पहले प्रोपीकोनाजोल दवा की डिमांड मुख्यालय को भेजी थी। दवा तो दूर अधिकारियों को यह भी जानकारी नहीं कि दवा कब तक आएगी।
जिले में दस्तक दे चुका है पीला रतुआ: पीला रतुआ बीमारी गेहूं की फसल के लिए बहुत ही ज्यादा खतरनाक होती है। एक बार यह बीमारी हावी हो गई तो फसल को पूरी तरह तबाह कर देती है। कुछ दिन पहले गांव दामला, रतनगढ़, खुर्दबन क्षेत्र की गेहूं में पीला रतुआ दिखाई दिया था। तब करनाल से कृषि विशेषज्ञों की टीम ने दौरा किया था। आनन फानन में अधिकारियों ने प्रोपीकोनाजोल दवा का छिड़काव कर इस पर काबू पाया था। अभी भी कहीं-कहीं इस बीमारी के लक्षण देखे गए हैं।
एक माह से दवा का इंतजार: कृषि विभाग के अधिकारियों ने एक माह पहले प्रोपीकोनाजोल दवा की डिमांड मुख्यालय से की थी। 10 हजार हेक्टेयर के लिए दवा का प्रपोजल बनाकर भेजा गया था। अभी तक तय नहीं हो पाया कि दवा कब तक आनी है। सूत्रों की माने तो पिछले सप्ताह ही सरकार ने दवा का आर्डर कंपनी को दिया है। इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि कब कंपनी के साथ कागजी कार्रवाई पूरी होगी, कब रेट तय होगा और कब दवा जिलों में पहुंचने के बाद किसानों को मिलेगी।
50 प्रतिशत सब्सिडी पर मिलनी है दवा : जब यह दवा आएगी तो विभाग इसे किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर देगा। बाजार में 250 एमएल प्रोपीकोनाजोल दवा की कीमत 200-250 रुपए है। कंपनी के अनुसार दवा का रेट बढ़ता जाता है।
फसल पकने के वक्त आती है दवा: किसान संजू गुंदियाना का कहना है कि अब किसानों को उक्त दवा की सख्त जरूरत है। ताकि लक्षण दिखने पर दवा का छिड़काव किया जा सके। संजू का आरोप है कि पिछले साल भी जब फसल पकने वाली थी तब दवा आई थी। विभाग समय रहते दवा देता नहीं इसलिए किसान भी बाद में लेने से परहेज करते हैं।
दवा का छिड़काव करें
पीला रतुआ के लक्षण दिखने पर किसान को 250 एमएल प्रोपीकोनाजोल दवा का छिड़काव एक एकड़ में 10-10 दिन के अंतराल में दो बार करना चाहिए। यह बीमारी हवा के साथ दूसरे खेत में भी हो जाती है इसलिए शाम को ही पानी दें। पीला रतुआ ग्रस्त फसल से निकल कर दूसरे खेत में न जाएं। फिर भी बीमारी न थमे तो तुरंत अपने एडीओ, एसडीओ या कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करना चाहिए।
एक माह पहले भेजी थी डिमांड: डीडीए
कृषि उप निदेशक आदित्य प्रताप का कहना है कि एक माह पूर्व प्रोपीकोनाजोल दवा की डिमांड भेजी थी। जल्द ही दवा आ जाएगी। फिलहाल पीला रतुआ बीमारी कंट्रोल में हैं। लेकिन तेज धूप निकलने से इस बीमारी के दोबारा आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए किसान सुबह-शाम अपने खेतों पर नजर रखे।
अधिक नमी से बीमारी
जब मौसम में नमी की मात्रा अधिक हो जाती है तब पीला रतुआ बीमारी लगने की संभावना बढ़ जाती है। यमुना नदी बैलेट से सटी फसलों में असर ज्यादा होता है। क्योंकि पिछले दिनों बरसात हुई थी और कुछ दिनों से धूप भी तेज निकल रही है। इससे किसान परेशान हैं।
किसान कैसे रखें नजर
किसान को सुबह-शाम अपने गेहूं के खेत पर नजर रखनी चाहिए। सफेद कपड़े की धोती बांध कर या हाथ में सफेद कागज लेकर गेहूं के खेत से निकलना चाहिए। अगर कपड़ा या कागज पीला होने लगे तो समझे की यह पीला रतुआ के लक्षण है।