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कस्बे में बस स्टैंड न होने से दैनिक यात्री परेशान
भास्कर न्यूज - बिलासपुर
कस्बे में स्थाई बस स्टैंड न होने से दैनिक यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बसों के ठहराव का स्थान तय न होने से यात्रियों को बस पकडऩे के लिए सड़क पर इधर से उधर भागना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से कस्बे में स्थाई बस स्टैंड की मांग की है। रोडवेज व पंचायत प्रशासन जमीन न होने का बहाना बना कर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। विधायक व सांसद का आश्वासन भी कोरा साबित हुआ।
कस्बे को उपमंडल का दर्जा मिले पांच साल से अधिक हो गया है। लेकिन यहां आज तक स्थाई बस स्टैंड नहीं बना। जिसके चलते दर्जनों गांवों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कस्बावासी रामकुमार, सुनील गुप्ता, राजीव कुमार, अश्विनी मंगला, रोहित कुमार, जयकुमार व अशोक सैनी का कहना है कि कस्बे में बसों के ठहराव का कोई तय स्थान नहीं है। बसें सड़क पर कभी आगे आकर रुकती है तो कभी पहले ही सवारियां उतार कर चलती बनती है। ऐसे में सवारियां बस पकडऩे के लिए आगे पीछे भागती रहती है। आज कल विशेष असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
क्यू शेल्टर भी नहीं: यात्रियों की सुविधा के लिए यहां बस क्यू शेल्टर तक भी नहीं बनाया गया है। हर रोज कस्बे से हजारों की संख्या में यात्री रोडवेज व निजी परिवहन समिति की बसों में सफर करते हैं। अलसुबह तीन हजार से अधिक स्टूडेंट्स यमुनानगर, जगाधरी, अम्बाला व चंडीगढ़ के लिए बसें पकड़ते हैं। लेकिन यहां बसों की इंतजार के लिए कोई शेड भी नहीं बनाया गया है। सड़क के एक तरफ शेड बनाया गया था, जो रखरखाव के अभाव में तबेला बना हुआ है जगाधरी-नारायणगढ़ स्टेट हाईवे होने के कारण यहां दिन रात हैवी ट्रैफिक रहती है। सड़क पर बसों के रुकने के चलते यात्रियों को बसे भाग कर पकडऩी पड़ती है।
बस स्टैंड न होने से छात्राओं को विशेष असुविधा का सामना करना पड़ता है। स्टाप के आगे पीछे बसें रुकने से लड़कियों की बसे छूट जाती है। जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। दैनिक यात्रियों का कहना है कि रणजीत पुर व छछरौली से आने वाली बसों को मोडऩे के लिए जगह ही नहीं है। कुछ बसों को तो चालक स्कूल के ग्राउंड से मोड़ कर लाते हैं। कुछ चालक बसों को सड़क से ही घुमाने की कोशिश करते हैं जो खतरनाक है। उनका कहना है कि इन सभी समस्याओं से दुकानदार भी परेशान हैं।
बिलासपुर - कस्बे में स्टेट हाईवे पर बने शेड की हालत तबेले से भी बदतर।