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134ए के तहत फीस में छूट के लिए भटक रहे अभिभावक
भास्कर न्यूज - बिलासपुर
राइट टू एजुकेशन के तहत अपने बच्चों को फ्री एजुकेशन दिलाने के लिए मखौर गांव निवासी एक व्यक्ति सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट कर थक चुका है, लेकिन उसे कहीं से भी रास्ता नहीं दिखाई दे रहा है। स्कूल संचालकों ने फीस न भरने की एवज में बच्चों के नाम काट दिए। थककर अभिभावकों ने बच्चों को घर पर ही बिठा लिया। जिससे दो बच्चों का भविष्य अंधकारमय बन गया है।
सरकार ने गरीबों के बच्चों को बेहतर व सस्ती शिक्षा दिलाने के लिए एजुकेशन एक्ट 134ए के तहत फ्री शिक्षा का प्रावधान किया है। इसके तहत हर प्राइवेट स्कूल में फ्रेश एंट्री के हिसाब से 25 प्रतिशत बच्चों से सरकारी स्कूलों की तर्ज पर फीस ली जाएगी। मखौर गांव निवासी राजकुमार ने रसूलपुर स्थित एक पब्लिक स्कूल के संचालक पर उसके बच्चों को इस छूट से वंचित रखने का आरोप लगाया है। उसके बच्चे पिछले साल आठ साल से इस स्कूल में पढ़ रहे हैं। इस साल हर्ष पांचवीं व शिवानी सातवीं कक्षा में पढ़ रही है। शिवकुमार ने उन्हें अप्रैल 2013 में स्कूल में दाखिला दिलवाया। लेकिन स्कूल की फीस अदा न करने के कारण नवंबर माह में उसके बच्चों के नाम काट दिए गए। अपने बच्चों को स्कूल में दोबारा दाखिल करवाने के लिए उसने बीईओ, डीईओ व डीसी यमुनानगर के कार्यालयों के चक्कर काटे लिए, लेकिन उसे कहीं से भी राहत न मिली। स्कूल के चेयरमैन जितेंद्र सांगवान का कहना है कि नियमानुसार बच्चे फ्रेश एंट्री के हिसाब से इस छूट के पात्र है, लेकिन ये दोनों बच्चे उनके स्कूल में सात साल से पढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों के पेरेंट्स बीपीएल सूची में नहीं आते।
विभाग से मांगा स्पष्टीकरण : प्रिंसिपल
इस बाबत स्कूल की प्रिंसिपल सुमन सांगवान का कहना है कि इस बाबत शिक्षा विभाग से कईं बार स्पष्टीकरण व दिशा निर्देश मांगे गए, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। उनका कहना है कि यदि कोई अधिकारी लिखित में उन्हें इन बच्चों को छूट देने के लिए कहे तो वे तैयार है। ताकि वे छूट में दी गई राशि सरकार से क्लेम कर सकें। इस संबंध में डीसी यमुनानगर व डीईओ यमुनानगर को पत्र लिखे गए हैं, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं मिला। मखौर निवासी शिव कुमार का कहना है कि वह अनुसूचित जाति से संबंध रखता है। उसका कहना है कि इस छूट को पाने के लिए अधिकारी उसकी मदद नहीं कर रहे है। उसने माना कि उसके परिवार का नाम बीपीएल सूची से कट गया है। उसके नाम कोई जमीन नहीं है।