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सरकार के पास नहीं स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों की जानकारी
पानीपत - भारत सरकार के किसी भी मंत्रालय या विभाग के पास स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान 1900 से 1947 के बीच शहीद हुए किसी स्वतंत्रता सेनानी की जानकारी नहीं है। गृह मंत्रालय का तर्क है कि सभी शहीदों की महानता व्यापक रूप से इतनी सराही जाने वाली और स्पष्ट है कि उन्हें किसी सरकारी मान्यता की जरूरत नहीं। यह तर्क आरटीआई के तहत पानीपत के एक्टिविस्ट पीपी कपूर को भेजी गई लिखित जानकारी में दिया गया है। गनीमत यह है कि इस जवाब में शहीदों से संबंधित इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च की ओर प्रकाशित कुछ किताबों का जिक्र किया गया है।
कपूर ने नवंबर 2013 में प्रधानमंत्री कार्यालय से 1900 से 1947 के बीच ब्रिटिश सरकार ने फांसी देकर, मुठभेड़ या जेल में यातनाएं देकर जिन भारतीयों की हत्या कर दी थी, उनके नाम-पते, जन्म दिवस, बलिदान दिवस, उन पर लगे आरोप का ब्योरा मांगा था। शहीदों के आश्रितों को दी गई सहायता, सम्मान ((भारत रत्न आदि)) की भी जानकारी मांगी और पूछा कि इनमें से सरकार ने कितनों को शहीद का दर्जा दिया और कब? इस प्रार्थना पत्र को पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय और बाद में वहां से मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन काम करने वाली इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च ((आईसीएचआईआर)) के पास भेजी गई।
इस जवाब के मुताबिक आईसीएचआईआर के पास इस बाद का भी कोई रिकॉर्ड नहीं कि भारत सरकार ने कभी देश के शहीदों की स्थिति या उनके संबंध जानकारियों की कोई सूची बनवाई हो। न इस बारे में कोई निर्देश हैं।
आईसीएचआईआर ने यह जरूर बताया है कि 9 जनवरी, 2009 को शहीदों का राष्ट्रीय रजिस्टर बनाने के संबंध में हुई एक बैठक में जरूर में जलियांवाला बाग जैसे सामूहिक हत्याकांड को शामिल करने की चर्चा हुई थी। मगर इसके बाद इस रजिस्टर की क्या स्थिति है? क्या वो बना? इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।