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बिजली निगम में फिर हड़ताल

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - पानीपत
सभी सरकारी विभागों की राज्यस्तरीय हड़ताल तो खत्म हो गई, लेकिन पानीपत बिजली निगम में चौथे दिन भी काम नहीं हुआ। कारण बना हड़ताल में शामिल 111 अस्थायी कर्मचारियों में से 20 को निगम द्वारा निकाला जाना।
इसके विरोध में ड्यूटी पर पहुंचे सभी कर्मचारी कामकाज ठप करके गोहाना रोड पावर हाउस में एसई एमएस दहिया के ऑफिस के सामने प्रदर्शन करने पहुंच गए। इस दौरान कर्मचारियों और पुलिस में झड़प भी हुई। वहीं, तीन दिन बाद निगम पहुंचने वाले उपभोक्ताओं को फिर से निराश होकर वापस लौटना पड़ा।
हड़ताल के कारण फीडरों पर मेंटिनेंस भी नहीं हो पाई। इससे कई इलाकों को बिजली सप्लाई ठप रही। तीन दिन बाद खुले बिजली निगम कार्यालय में सैकड़ों उपभोक्ता सुबह 9 बजे ही निगम कार्यालय पहुंच गए। निगम में कामकाज भी शुरू हो गया था। आधे घंटे बाद ही कच्चे कर्मचारियों को निकाले जाने की बात जैसे-जैसे फैलती गई, निगम कर्मचारी लाइन लगे उपभोक्ताओं को वैसे ही छोड़ अपने कार्यालयों से बाहर निकलते गए। 15 मिनट के अंदर ही सभी कर्मचारियों ने एसई एमएस दहिया के ऑफिस के सामने एकत्र होकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। जो कर्मचारी फील्ड में निकल चुके थे, उन्हें भी फोन करके बुला लिया गया। इस दौरान कर्मचारी नेताओं और एसई एमएस दहिया में दो दौरे की बातचीत भी हुई, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। संबंधित खबर पेज-२० पर भी




भविष्य को लेकर दोनों पक्ष अपनी बात पर अड़े

20 कर्मचारियों को लेकर दोनों पक्ष अपनी बात पर अड़े हैं। निगम जानता है कि अगर इन कर्मचारियों को निकाल दिया गया तो आगे अगर फिर से हड़ताल होती है तो कोई कर्मचारी काम करने को तैयार नहीं होगा। वहीं, कर्मचारी नेताओं के समाने समस्या यह है कि उन्हें 111 कर्मचारियों में से 20 को निकालने का ऑफर दिया गया है। 20 कर्मचारियों का चुनाव करना उनके लिए मुश्किल है। इससे कमेटी में फूट पड़ेगी और आगे होने वाली हड़ताल में कच्चे कर्मचारी साथ छोड़ सकते हैं। इसलिए कर्मचारियों ने एकजुट होकर सभी कर्मचारियों को रखे जाने तक प्रदर्शन जारी रखने की चेतावनी दी है।