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११५ बसें चला रहे २१७ चालक, १६ और मांगे

8 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - पानीपत
रोडवेज में 38 नए ड्राइवरों के ज्वाइन होने के बाद भी अभी 16 ड्राइवरों की कमी है। डिपो में नौ बसों की कमी होने की तरफ विभाग का ध्यान नहीं जा रहा। बस की कमी सीधे यात्रियों को प्रभावित करती है।
रोडवेज में इस समय कुल 115 बसों पर २१७ ड्राइवर हैं। रोजाना करीब 100 बसें ही अलग-अलग रूट पर निकलती है। बची 15 बसों में से कुछ मेंटेनेंस के लिए गई होती हैं और कुछ की स्थिति कंडम होने के कारण उन्हें डिपो से बाहर ही नहीं निकाला जाता।
रोडवेज डिपो में पिछले महीने कुल 124 बसें थी। इसमें से नौ बसों की स्थिति कंडम होने के कारण उन्हें नीलाम कर दिया गया। अब बची हैं 115 बसें। रोडवेज विभाग 10 बसों पर 14 ड्राइवरों का आंकलन करता है। इस हिसाब से 115 बसों पर कुल 146 ड्राइवर होते हैं। जबकि विभाग के पास इस समय 217 ड्राइवर हो गए हैं। विभाग की 16 ड्राइवरों की मांग अभी बाकी है। जबकि पानीपत लोकल और कई अन्य रूटों बसें की कमी है। सफर के समय यात्रियों को भारी भीड़ का सामना करना पड़ता है। शामली, हरिद्वार, मेरठ, चंडीगढ़, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र की रूट पर यात्री ज्यादा होने के कारण बसों की कमी है।



पड़ता है प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना

॥लोकल रूट पर बस कम होने के कारण प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। बस के आने और जाने का समय पता ही नहीं चलता। रोडवेज विभाग को लोकल रूट के बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए। जिसके कारण यात्रियों को भारी भीड़ का सामना न करना पड़े। साथ ही अन्य कई ऐसे रूट हैं, जिसपर यात्रा करते समय यात्रियों को भारी भीड़ का सामना करना पड़ता है।

- गोविंद कुमार, यात्री

॥शामली-हरिद्वार रूट पर बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए। क्योंकि इस रूट पर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की संख्या ज्यादा है। असंध, सनौली, और बापौली की रूट का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। पानीपत से यमुनानगर, कुरुक्षेत्र आदि रूट की बसों को बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए।

- कपिल सोनी, यात्री



मांगी थीं ज्यादा बसें

॥रोडवेज के जीएम सुल्तान सिंह ने बताया कि बसों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई है। क्योंकि कुछ समय पहले नौ बसों को कंडम घोषित किया गया था। साथ ही ड्राइवरों की कमी को भी नहीं नकारा जा सकता। विभाग से 54 ड्राइवरों की मांग की थी। जिसमें से अभी 38 ही मिले हैं।