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डॉक्टरों को लुभा रही ‘कांट्रैक्ट की नौकरी’

8 वर्ष पहले
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संदीप शर्मा - पानीपत
एक महिला रोग विशेषज्ञ। छह साल से सरकारी नौकरी में हैं। अब उन्होंने स्वास्थ्य विभाग द्वारा रोहतक में निकाली गई कांट्रैक्ट आधार की नौकरी के लिए इंटरव्यू दिया है। अभी रिजल्ट नहीं आया है। सेलेक्शन होने के बाद वो नियमित नौकरी छोड़ देंगी। वजह, पक्की नौकरी में उनका वेतन 52 हजार रुपए है, जबकि कांट्रेक्ट पर करीब 80 हजार रुपए मिलेंगे। सप्ताह में तीन दिन ही काम करना पड़ेगा और अपना क्लीनिक चलाने या दूसरे किसी अस्पताल में काम करने पर भी कोई पाबंदी नहीं होगी। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस ((एचसीएमएस)) एसोसिएशन के प्रदेशअध्यक्ष डॉ. कुलदीप कहते हैं ऐसे बहुत सारे उदाहरण हैं। सेवा में प्रवेश स्तर पर प्रदेश में 40 से 45 हजार रुपए वेतन मिलता है जबकि स्वास्थ्य विभाग विभिन्न प्रोजेक्ट्स में ठेके पर 80 से 90 हजार रुपए वेतन देता है। यही नहीं नियमित डॉक्टर्स पर हेल्थ सर्विस के अलावा दूसरे काम का भी लोड है। इसी वजह से हर जिले में डॉक्टर्स के पद खाली पड़े हैं। सिर्फ गुडग़ांव, फरीदाबाद व पंचकूला में डॉक्टर्स के पद भरे होने को लेकर स्थिति संतोषजनक है।
भिवानी, झज्जर, पलवल व मेवात में तो 40 प्रतिशत पद ही भरे हैं। रोहतक में 32 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। बता दें कि तीन महीने पहले सरकार ने नियमित पदों पर 152 डॉक्टरों को नियुक्ति दी। 50 ने तो ज्वाइन ही नहीं किया। जिन्होंने ज्वाइन किया उनमें से 53 एक महीने बाद ही काम पर आना छोड़ गए। मार्च 2008 में उचाना के विधायक बीरेंद्र सिंह विधानसभा में सवाल उठाया था कि डॉक्टर सरकारी नौकरी में नहीं टिकते क्योंकि यहां वेतन कम है। जवाब में सीएम ने कहा कि वेतन के मामले में प्रदेश के डॉक्टरों को पंजाब से आगे कर दिया जाएगा।






पानीपत सिविल अस्पताल में काले बिल्ले लगाकर काम करते डॉक्टर।

शुरुआत हो भी गई है...

॥ डॉक्टरों की मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। जहां तक कांट्रेक्ट नौकरी में डॉक्टरों को ज्यादा वेतन देने का सवाल है, तो यह अस्थायी व्यवस्था है। नियमित डॉक्टर नहीं मिल रहे। -एनके अरोड़ा, डीजी, हेल्थ, हरियाणा।

कागजों और हकीकत में अंतर स्वास्थ्य विभाग अपने रिकॉर्ड में उन डॉक्टर्स को भी गिन रहा है जो पिछले छह से आठ साल से न तो नौकरी पर आए और न ही त्यागपत्र किया। रोहतक में 12 डॉक्टर छह साल से गैर हाजिर चल रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश के करीब 125 डॉक्टरों को सीएचसी या पीएचसी से हटाकर तीन मेडिकल कॉलेजों खानपुर कलां, नल्हड़ व करनाल में लगा दिया है। लेकिन कागजों में इन्हें मेडिकल कॉलेज कैडर की बजाय हेल्थ सर्विस कैडर में ही दिखाया जा रहा है।



पंजाब के समान वेतन के लिए खुंगा का आमरण अनशन

जींद . हरियाणा राज्य एजुकेशन मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन ने प्रदेश के दो बड़े संगठन सर्व कर्मचारी संघ और कर्मचारी महासंघ से नाता तोड़ लिया है। महासंघ को इनेलो से जुड़ा और सर्व कर्मचारी संघ को कामरेडों का संगठन बताते हुए मिनिस्ट्रियल स्टाफ की मांगों को लेकर एसोसिएशन प्रदेशाध्यक्ष देवेंद्र खुंगा ने जींद में आमरण अनशन शुरू कर दिया है। मिनिस्ट्रियल स्टाफ की मुख्य मांग पंजाब के समान वेतनमान की है। जींद डीईईओ कार्यालय परिसर में अनशन पर बैठे देवेंद्र खुंगा को समर्थन देने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों से एसोसिएशन पदाधिकारी जींद पहुंचे। प्रदेशाध्यक्ष देवेंद्र खुंगा ने कहा कि तीन दिन की हड़ताल के नाम पर कर्मचारी महासंघ और सर्व कर्मचारी संघ ने राजनीति की है।

गिरफ्तार हड़ताली कर्मचारी नेता रिहा

हिसार . हरियाणा कर्मचारी तालमेल कमेटी के आह्वान पर 21 जनवरी से 72 घंटे की हड़ताल के पहले दिन फतेहाबाद बस स्टैंड से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी नेताओं सरबत सिंह पूनिया, राज्य प्रधान हरियाणा रोडवेज वर्कर यूनियन, डिपो प्रधान फतेहाबाद शिव कुमार व सर्व कर्मचारी संघ नेता ओमनाथ सहित 11 नेताओं को सरकार की दमनकारी नीतियां अपनाते हुए हिरासत में लिया गया था। जिन्हें शुक्रवार को हिसार जेल से रिहा किया गया। कर्मचारी नेताओं का सर्व कर्मचारी संघ जिला हिसार के कर्मचारियों ने रिहा हुए साथियों का स्वागत किया। रिहा हुए कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार गिरफ्तारी के डर से उनकी आवाज दबाना चाहती थी।

मांगें क्लास वन अफसर का दर्जा मिले।

पंजाब या हिमाचल पैटर्न पर वेतन निर्धारण हो या डॉक्टरों को विशेष पैकेज मिले। रुरल पोस्टिंग की शर्त खत्म हो।

मेडिकल ऑफिसर को 8,700, सीनियर मेडिकल ऑफिसर को 8,900 और चीफ मेडिकल ऑफिसर ((सीएमओ)) को 9,500 का ग्रेड पे मिले।



मार्केट फीस खत्म करने के विरोध में आढ़तियों की हड़ताल ३१ से

सब्जी पर मार्केट फीस खत्म करने का विरोध शुरू हो गया है। शुक्रवार को सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन हरियाणा के आह्वान पर जींद में सब्जी मंडी के सामने एक होटल में राज्य स्तरीय सम्मेलन बुलाया।कर दी है। आढ़तियों ने कहा कि जब मार्केट फीस ही नहीं रही तो उनके लाइसेंस का औचित्य नहीं रहेगा और कोई भी सीधे किसानों से सब्जी लेगा और बेचेगा। इस पर अब जल्द सरकार इस पर फैसला नहीं लेती तो 31 जनवरी से आढ़ती तीन दिन की हड़ताल शुरू करेंगे।



असर सब्जियों का संकट : प्रदेश में 112 सब्जी मंडियां हैं और 10 हजार टन से अधिक सब्जियों की लागत हर दिन होती है। सब्जी आढ़तियों की हड़ताल शुरू होने पर प्रदेश में ३ दिन तक सब्जियों का संकट रहेगा।

अब प्रदेश के सरकारी डॉक्टरों ने मोर्चा खोलते हुए जता दिया है कि वे अब चुप बैठने वाले नहीं हैं। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को काले बिल्ले लगाकर रोष जताया। यह सरकार को एक चेतावनी थी अब एचसीएमएस की सभी जिलों इकाइयों के प्रधान, उप प्रधान व महासचिवों की 26 जनवरी को रोहतक में मीटिंग होगी। जिसमें अगली रणनीति बनाई जाएगी। डॉक्टर्स अनिश्चित कालीन हड़ताल पर भी जा सकते हैं।



असर डॉक्टर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए तो प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो जाएंगी। पीजीआई रोहतक में भी इलाज संभव नहीं होगा। लोगों को मजबूरन निजी अस्पतालों में इलाज करवाना पड़ेगा।

डॉक्टरों ने काले बिल्ले लगाकर रोष जताया, 26 को तय करेंगे नई रणनीति

भास्कर टीम - हरियाणा

जनवरी में जाते-जाते सर्दी और कर्मचारी प्रदेश की जनता को खूब कर रहे हैं। रोडवेज और सर्व कर्मचारी संघ की चार दिन की हड़ताल ने जनजीवन पर ब्रेक लगा दिया। कर्मचारी सरकार के खिलाफ धरने प्रदर्शन करते रहे और जनता बिजली-पानी के लिए सड़कों पर उतरी। लेकिन समस्या अभी हल नहीं हुई है। कर्मचारी अब भी बेचैन हैं। एक कर्मचारी यूनियन की मांगों का हल निकलने से पहले दूसरी यूनियन हड़ताल की धमकी देने लगती है। चुनावी मौसम है। लिहाजा शुक्रवार से काले बिल्ले लगा कर सांकेतिक हड़ताल से शुरुआत कर चुके सरकारी डॉक्टर मांगें मनवाने के लिए काम छोड़ हड़ताल कर सकते हैं। कर्मचारी चाह रहे हैं कि किसी भी सूरत में उनकी मांगों को सरकार लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से पहले पूरा कर दे।

तैयार रहें, हड़तालें अभी और भी हैं

27, 28 और 29 जनवरी को

जूनियर इंजीनियर नहीं करेंगे काम

हिसार सर्कल के जूनियर इंजीनियरों ने पे ग्रेड बढ़ाने को लेकर हड़ताल की घोषणा कर दी है। शुक्रवार को डिप्लोमा इंजीनियरिंग एसोसिएशन के बैनर तले पीडबल्यूडी रेस्ट हाउस में हुई बैठक में सभी विभागों के इंजीनियरों ने सरकार पर उनकी मांग की अनदेखी करने का आरोप लगाया। 27, 28 और 29 जनवरी को सभी जेई ब्लैक बैज लगाकर अपना विरोध जताएंगे। यह विरोध प्रदर्शन प्रदेशभर में होगा। 11 फरवरी को हिसार जोन में पेन डाउन हड़ताल होगी।



असर पीडब्ल्यूडी, पब्लिक हेल्थ, मार्केटिंग बोर्ड, नगर निगम, बीएंडआर सहित सभी सरकारी महकमों के जेई इस दिन काम ठप रखेंगे। बिजली, पानी की आपूर्ति और मंडियों का काम प्रभावित होगा।

मांगें जूनियर इंजीनियरों का पे ग्रेड बढ़ाया जाए। पंजाब के समान वेतन मिले।

मांगें सिविल सेक्रेटेरिएट कर्मचारियों के बराबर वेतनमान दिया जाए। सरकार बोर्ड कर्मचारियों पर पेंशन नियम स्वीकृत करें। सरकार बोर्ड के पेंडिंग 65 करोड़ रुपये का भुगतान करें। बोर्ड में नियमित भर्ती की जाए व बोर्ड में डेपुटेशन पर आए कर्मचारियों को वापस उनके विभागों में भेजा जाए।



शिक्षा बोर्ड कर्मचारी तालमेल कमेटी का आंदोलन शुक्रवार को 19वें दिन में प्रवेश कर गया। इसके बावजूद बोर्ड प्रशासन ने उनकी मांगों को लेकर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया। इस बात को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों ने ऐलान कर दिया कि वे शनिवार को बोर्ड से निकलने वाली एचटेट की स्टेशनरी को नहीं निकलने देंगे। कर्मचारियों के धरने को संबोधित करते हुए शुक्रवार को कर्मचारी नेता ऋषिराम शर्मा ने कहा कि वे अपनी जायज मांगों को लेकर पिछले 19 दिन से आंदोलन कर रहे हैं।



असर एक और दो फरवरी को होने वाली एचटेट की परीक्षा में समस्या होगी। समय पर स्टेशनरी नहीं पहुंची तो कई जगह परीक्षा रद्द होने की नौबत आ सकती है। परीक्षार्थी पहले ही दूर-दूर सेंटर आने से परेशान हैं।

शनिवार से एचटेट परीक्षा के लिए स्टेशनरी नहीं उठाने देंगे शिक्षा बोर्ड के कर्मचारी