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झोलाछाप चिकित्सकों से बढ़ रहा काला पीलिया
मुकेश टंडन - रोहतक
प्रदेश में फैला झोलाछाप चिकित्सकों का मकडज़ाल लोगों की जान का दुश्मन बनता जा रहा है। खासकर हरियाणा के कुछ इलाकों में फैले हेपेटाइटिस सी((काला पीलिया)) के मरीजों के लिए किए सर्वे में यह बात मुख्य रूप से सामने आई है। रोग को बढ़ता देख प्रदेश के एकमात्र स्वास्थ्य संस्थान पीजीआईएमएस रोहतक में ही इसकी जांच शुरू होगी और एक क्लिक पर ही लीवर पर हुए असर का पता लग जाएगा। जांच के लिए लेबोरेट्री और मशीन खरीदने के लिए एक करोड़ 78 लाख रुपए पीजीआई को सौंप दिए गए हैं। सब कुछ ठीक रहा तो एक माह के भीतर ही यह मशीन यहां पहुंच जाएगी।
१०० में २० काला पीलिया से ग्रस्त
राज्य में हेपेटाइटिस सी की पहचान पंजाब के साथ लगते फतेहाबाद, जींद व कैथल जिले से हुई। काफी संख्या में मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कराए सर्वे में सामने आया कि प्रदेश में झोलाछाप चिकित्सकों की वजह से लोग हेपेटाइटिस सी के शिकार हो रहे हैं। भारी तादाद में मरीजों के मिलने पर राज्य सरकार ने पीजीआई के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग में नोडल सेंटर और डा.प्रवीण मल्होत्रा को नोडल अधिकारी बनाया। डा.प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि लगातार किए जा रहे सर्वे के दौरान सामने आया है कि करनाल, असंध, पानीपत, समालखा और सोनीपत में भी हेपेटाइटिस सी पांव पसार चुका है, जबकि रोहतक, बहादुरगढ़ व झज्जर में प्रभाव कम है। अधिकतर 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोग चपेट में हैं। देश में हुए सर्वे के अनुसार 100 मरीजों की जांच में मात्र 3 प्रतिशत तक में हेपेटाइटिस सी पाया जाता है, जबकि प्रदेश में यह स्थिति भयावह होती जा रही है। हाल ये है कि उक्त क्षेत्रों में मरीजों की संख्या 100 में से 20 प्रतिशत तक पाई जा रही है।
नोडल सेंटर में स्थापित होगी फाइब्रो स्कैन और लेबोरेट्री
पीजीआई में स्थापित नोडल सेंटर में हेपेटाइटिस सी से ग्रस्त मरीजों की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक करोड़ 78 लाख रुपए मशीन की खरीद व लेबोरेट्री स्थापित करने के लिए अदा किए हैं। इनमें 50 लाख में लेबोरेट्री स्थापित होगी और राशि माइक्रो बायलॉजी विभाग को दे दी गई है। इसके साथ ही एक करोड़ 8 लाख रुपए की ‘फाइब्रो स्कैन’ मशीन खरीदी जाएगी जो नोडल सेंटर में स्थापित होगी जबकि 20 लाख रुपए से दूरबीन व अन्य उपकरणों की खरीद की जाएगी।
देश में सबसे पहले इस बीमारी की पहचान पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर से हुई। यहां पर इस बीमारी के होने का सबसे बड़ा कारण नशा और सेक्स को पाया गया। अधिक मरीज आंध्र प्रदेश में भी मिले, वहां पर इसका बड़ा कारण सेक्स वर्कर पाए गए। तीसरा सबसे बड़ा केंद्र पंजाब मिला यहां पर नशे के लिए प्रयोग की जाने वाली सीरिंज बड़ा कारण पाया गया
मणिपुर से शुरू हुई बीमारी की पहचान