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प्रशासन की अनदेखी से क्षुब्ध 7 जिला पार्षदों ने दिया इस्तीफा, उपायुक्त बोले, सूचना नहींजिला विकास भवन से डीसी के दफ्तर तक पहुंचते-पहुंचते दो पार्षदों ने बदला फैसलाजिला परिषद की राजनीति...

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - रोहतक
जिला परिषद की राजनीति एकाएक गरमा गई है। गुरुवार को बैठक के दौरान कुछ पार्षदों ने प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया और बैठक का बहिष्कार कर दिया। इसके बाद सात पार्षदों ने एडीसी और जिला परिषद चेयरमैन को इस्तीफे की प्रति देकर कैंप कार्यालय पहुंचकर डीसी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। वहीं, डीसी डा. अमित अग्रवाल का कहना है कि जिला परिषद सदस्यों के इस्तीफे के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। किसी का इस्तीफा उन्हें नहीं मिला है। पार्षदों द्वारा इस्तीफे दिए जाने को लेकर जिला विकास भवन व लघु सचिवालय में दिनभर गहमागहमी का माहौल रहा।
इससे पहले, गुरुवार सुबह 11 बजे लघु सचिवालय में जिला परिषद के चेयरमैन राजेश भालौठ व एडीसी आरसी बिधान की मौजूदगी में 14 पार्षदों वाली जिला परिषद के एजेंडे की बैठक चल रही थी। इस दौरान कुछ पार्षदों ने जिला प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। एडीसी ने पार्षदों के समझाने की कोशिश की, लेकिन पार्षदों ने प्रशासन पर उनकी बात को बार-बार टरकाने का आरोप लगाते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया। असंतुष्ट पार्षदों ने अपना इस्तीफा देने की योजना बनाई। सात पार्षद जयवीर, राजबीर, सोनू देवी, केलावती, कृष्ण, पुष्पा व संदीप का कहना है कि उन्होंने कैंप कार्यालय पहुंचकर डीसी को अपना इस्तीफा सौंपा है।
इस्तीफे में दिखाए ३ बिंदु
ञ्चअधिसूचना जारी होने के बाद भी जिला परिषद को डीआरडीए का कार्यभार न सौंपना।
ञ्च पंचायती राज की सबसे बड़ी संस्था होते हुए ग्रामीण विकास के किसी भी कार्य में जिला परिषद की कोई प्रत्यक्ष भागीदारी न होना।
ञ्च प्रशासन व सरकार द्वारा जिला परिषद की अनदेखी करना।
असंतुष्ट पार्षदों का तर्क, उनके पास नहीं कोई पावर
वार्ड 4 की पार्षद पुष्पा शर्मा का कहना है कि विकास कार्य के लिए कितनी ग्रांट आई, कितनी लागत से कौन सा काम हुआ इसके बारे में पार्षदों को कोई जानकारी नहीं दी जाती। कई दस्तावेजों में गांव के नंबरदार की जरूरत पड़ती है, लेकिन पार्षदों को कहीं नहीं पूछा जाता। कई बार शिकायत के बाद भी प्रशासन ने सुनवाई नहीं की, जिसके चलते इस्तीफा देना पड़ा। वार्ड 1 के जिला पार्षद जयवीर का कहना है कि पार्षद पूरी तरह अधिकार विहीन हैं। अपनी मांगों को लेकर एमपी, सीएम से बातचीत करने की कोशिश की जाती है, लेकिन फोन तक रिसीव नहीं होता। आवास पर जाने के बाद मुलाकात नहीं होती। हां, रैली या जनसभा होने पर उक्त सभी के फोन जरूर आ जाते हैं।
दो ने बदला फैसला
इस्तीफा देने वालों में कुल नौ जिला पार्षद शामिल थे। जिला विकास भवन में एक साथ योजना भी बनाई, लेकिन डीसी आवास तक पहुंचते पहुंचते दो पार्षदों ने इस्तीफा देने का फैसला बदल लिया। इसके बाद शेष सात पार्षदों ने अपना इस्तीफा दिया।