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रोडवेज में हड़ताल बेअसर, सड़कों पर दौड़ीं बसें

8 वर्ष पहले
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बल्लभगढ़। हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी की ओर से बसों की हड़ताल समाप्त कर दी गई है, लेकिन रोडवेज यूनियन का एक गुट चौथे दिन गुरुवार को भी हड़ताल पर रहा। बल्लभगढ़ बस अड्डे पर करीब दो दर्जन कर्मचारी गुरुवार को भी पूरा दिन धरने पर बैठे रहे। सुबह के समय इन कर्मचारियों ने कुछ बसों को रोकने का प्रयास किया। लेकिन पुलिस ने उन्हें कामयाब नहीं होने दिया। डिपो की सभी बसें निर्धारित समयानुसार चलीं।


सोमवार को डिपो की 150 सिटी बसें व 102 सामान्य बसों का हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी के आह्वान पर कर्मचारियों ने चक्का जाम कर दिया था। उन्होंने सोमवार को एकजुटता का परिचय देते हुए एक भी बस को डिपो से बाहर नहीं निकलने दिया था। सोमवार को प्रशासन ने कर्मचारियों के साथ बातचीत कर काफी प्रयास किए थे कि रोडवेज की बसें चली जाएं। लेकिन कर्मचारियों ने बसों का संचालन नहीं किया था। इसके बाद मंगलवार को रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल में नाटकीय मोड़ आया और कर्मचारी यूनियन दोफाड़ हो गई। मंगलवार सुबह कर्मचारी यूनियन के एक गुट ने हड़ताल समाप्त कर बसों को चलाना शुरू कर दिया। जबकि दूसरे गुट ने बसों को रोकने का प्रयास किया तो पुलिस ने विरोध करने वाले कर्मचारियों को वहां से खदेड़ दिया था। इसके बाद रोडवेज बसों का संचालन तो शुरू हो गया था, लेकिन कुछ कर्मचारी डिपो में हड़ताल पर ही बैठे रहे।

दरअसल सर्व कर्मचारी संघ से संबंधित हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारियों ने सरकार से हुई वार्ता को नहीं माना। इस वजह से फरीदाबाद डिपो के करीब 40 कर्मचारी हड़ताल कर सोमवार से गुरुवार तक डिपो में ही धरने पर बैठे रहे। यूनियन के डिपो प्रधान जितेंद्र धनखड़ ने आरोप लगाया कि अन्य यूनियन सरकार के दबाव में आ गई। इससे उन्होंने हड़ताल खत्म करने की घोषणा कर दी। जबकि सर्व कर्मचारी संघ से संबंधित यूनियन हड़ताल पर अडिग रही। इससे जुड़े कर्मचारी चार दिन तक लगातार हड़ताल पर रहे। रोडवेज के जीएम सुरेंद्र यादव के अनुसार गुरुवार को रोडवेज की सभी बसें ऑन रूट रहीं और बिना किसी रुकावट के चलीं। रोडवेज बसें सुचारू रूप से चलाने के लिए पहले से ही पुख्ता इंतजाम किए गए थे।