रंग तरंग नाट्य महोत्सव का समापन
भास्कर न्यूज - फरीदाबाद
नगर निगम सभागार में रंग तरंग नाट्य महोत्सव के आखिरी दिन बिहार स्थित कोसी नदी और उत्तराखंड त्रासदी पर नाटक व माइम प्रस्तुत किया गया। इसे देख सभी की आंखें नम हो गईं।
कार्यक्रम की शुरुआत रागिनी के साथ हुई। रागिनी गायक राजकुमार तेवतिया ने ऐसा समां बांधा कि सभी लोग देशभक्ति के रंग में रंग गए। फोक कलाकार राजकुमार तेवतिया ने सुभाष चंद्र बोस को केंद्रित कर एक रागिनी गाई। इसके बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू कॉलेज के कलाकारों ने उत्तराखंड त्रासदी को लेकर माइम ((मूक अभिनय))पेश किया। पांच मिनट के इस मूक अभिनय में कलाकारों ने उत्तराखंड में आई बाढ़ को बखूबी दिखाया। इस दौरान देश के जवानों ने जिस तरीके से लोगों की सहायता की और हमारे राजनेताओं ने इस पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकी इन सभी अवस्थाओं को बिना बोले कलाकारों ने पेश कर खूब वाहवाही लूटी।
महोत्सव में बिहार में मौजूद कोसी नदी पर एक बेहतरीन नाटक खेला। बृज नट मंडली द्वारा पेश किया गया कोसी का कासा नाटक के माध्यम से उन परिस्थितियों को दिखाया गया। कैसे लोग भुखमरी के शिकार हो जाते हैं। नाटक के निर्देशक व रंग वन कला मंच के चेयरमैन आनंद सिंह भाटी ने बताया कि बिहार में कोसी नदी को बिहार का शोक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जब कोसी में बाढ़ आती है तो वह अपने साथ लोगों के घरों, खेत , खलिहानों को बहा कर ले जाती है। इसके बाद खेती की जमीन भी बंजर हो जाती है। नाटक में भुलवा मछुआरा है। उसकी बीबी गहना को कई सालों से संतान की प्राप्ति नहीं होती है। वह कोसी नदी से मन्नत मांगते हैं कि उन्हें संतान होगी तो वे कोसी मईया को अनाज भेंट करेंगे। इसके बाद कोसी नदी उनकी झोली में संतान दे देती है। लेकिन अचानक गांव में बाढ़ आ जाती है। कोसी नदी पूरे उफान पर होती है।
भुलवा, गहना अपनी छोटी सी संतान के साथ जान बचा कर टीले पर पहुंच जाते हैं। वहां पहुंचने के बाद उन्हें भूख लगती है। इस पर भुलवा मछली पकडऩे के लिए नदी की तरफ चला जाता है। गहना ब\\\"ो को लोरी सुना कर सुला देती है और लकड़ी खोजने चली जाती है। इसी दौरान उनका ब\\\'\\\'ाा नदी में गिर जाता है और मछुआरे की तरफ चला जाता है। मछुआरा भुलवा इस ब\\\"ो को मछली समझ कर मार देता है और कहता है कि आज बहुत बड़ी मछली पकड़ी है। इस तरह से कोसी नदी अपना ब\\\"ाा वापस ले लेती है। इस मौके पर बृज नट मंडली के प्रधान बृज मोहन भारद्वाज, एस्ट्रॉन एजुकेशन सोसाइटी के संस्थापक एसपी फोगाट, रंगवन कला मंच के चेयरमैन आनंद सिंह भाटी, मोहित कांधारी, मनोज भारद्वाज, सुदर्शन, अनुज नागर आदि लोग मौजूद थे।