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‘सरकार का भू-मालिकों के साथ धोखा’

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज - रामपुर बुशहर
भाजपा के प्रत्याशी रहे एवं पूर्व आईएएस अफसर प्रेम सिंह दरैक ने कहा है कि सरकार और एसजेवीएनएल अधिकारियों की मिलीभगत से लूहरी प्रोजेक्ट प्रभावितों को अंधेरे में रखा जा रहा है।
सरकारी नीति के तहत अधिग्रहण नहीं
पत्रकारों को संबोधित करते हुए दरैक ने कहा कि सतलुज बेसिन में प्रस्तावित 612 मेगावाट की लूहरी परियोजना निर्माण में इस्तेमाल की जाने वाली निजी जमीन को नई सरकारी नीति के तहत अधिग्रहण नहीं किया जा रहा है। एसजेवीएन अफसरों एवं सरकार ने विस्थापितों को मिलने वाले लाभ पर कैंची चलाकर नई नीति के लागू होने से एक दिन पहले ही प्रभावित पंचायतों के लिए जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना जारी कर दी। भू-अर्जन एवं पुनर्वास की नई नीति के तहत निजी भूमि अधिग्रहण की एवज में प्रत्येक भू-मालिक को परियोजना में अनिवार्य रूप से रोजगार दिए जाने का प्रावधान है।
नौकरी नहीं तो पांच लाख रुपए की अदायगी
यदि भू-मालिक परियोजना में नौकरी के इच्छुक नहीं हैं तो उसे 5 लाख रुपए की एकमुश्त अदायगी के अलावा 20 वर्षों तक 2 हजार रुपए मासिक भत्ता मिलेगा। अहम पहलू यह है कि परियोजना निर्माण में इस्तेमाल की जाने वाली जमीन को जहां पहले सरकारी दर से एक्वायर कर मुआवजा दिया जाता था। वहीं अब नए एक्ट में मार्केट रेट से चार गुणा ज्यादा मुआवजा जमीन मालिक को देना पड़ेगा। परियोजना निर्माण के दौरान अगर किसी व्यक्ति का मकान चला जाता है तो उसे परियोजना प्रबंधन द्वारा मकान बनाकर दिए जाना जरूरी है। किराएदार तक को नई भू-अर्जन एवं पुनर्वास नीति में फायदा देना होगा।



पत्रकार वार्ता को संबोधित करते भाजपा नेता पीएस दरैक और अन्य।